जींद/सफीदों (एस• के• मित्तल)। जापान में आयोजित एशियन गेम्स में शूटिंग स्पर्धा में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतने वाली जींद की बेटी नीरू ढांडा के नकद पुरस्कार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। तीन पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन करने वाली नीरू मूल रूप से जींद जिले के संगतपुरा गांव की निवासी हैं, लेकिन वह मध्य प्रदेश की ओर से खेलती हैं। ऐसे में परिवार को आशंका है कि हरियाणा सरकार की खेल पुरस्कार नीति के तहत उन्हें नकद राशि मिलेगी या नहीं।
तीन पदकों पर पांच करोड़ रुपये का सवाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा सरकार की पुरस्कार नीति में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता के लिए तीन करोड़ और रजत पदक विजेता के लिए दो करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।
इस हिसाब से नीरू के दो स्वर्ण और एक रजत पदक पर कुल आठ करोड़ रुपये बनते हैं। हालांकि दूसरे और तीसरे पदक के लिए पुरस्कार राशि आधी किए जाने के प्रावधान के आधार पर परिवार पांच करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जता रहा है।
मध्य प्रदेश से खेलने के कारण बढ़ी चिंता
नीरू का पैतृक गांव हरियाणा में है, लेकिन वह प्रतियोगिताओं में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसी कारण परिवार को पुरस्कार की पात्रता को लेकर संशय है। परिजनों का कहना है कि नीरू की उपलब्धियों को देखते हुए सरकार को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
स्वागत समारोह में मामा ने उठाई मांग
बुधवार को संगतपुरा गांव में नीरू ढांडा के सम्मान में स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में तीन मंत्री भी पहुंचे थे।
समारोह के दौरान नीरू के मामा सोमवीर पहलवान ने सार्वजनिक मंच से नकद पुरस्कार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नीरू आर्थिक रूप से कमजोर बीपीएल परिवार से आती हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद शूटिंग जैसे महंगे खेल में सफलता हासिल की है।
परिवार को सरकार से फैसले का इंतजार
परिजनों का कहना है कि नीरू ने कठिन परिस्थितियों में अभ्यास कर देश के लिए पदक जीते हैं। इसलिए उन्हें उनकी उपलब्धियों के अनुरूप सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
फिलहाल हरियाणा सरकार की ओर से पुरस्कार की पात्रता या भुगतान को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। परिवार को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में उचित फैसला करेगी।
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