नारनौल में सरकारी पोर्टल पर दर्ज शौचालय से जुड़ी शिकायत को महज तीन दिन में निपटा हुआ दिखा दिया गया, लेकिन मौके पर स्थिति कुछ और ही नजर आई। शिकायतकर्ता के अनुसार 15 अगस्त को पोर्टल पर शौचालय में गंदगी और सफाई की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 18 अगस्त को पोर्टल पर शिकायत का समाधान होने की जानकारी अपडेट कर दी गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पोर्टल पर शिकायत बंद किए जाने के बावजूद मौके पर सफाई नहीं हुई। शौचालय परिसर में गंदगी बनी हुई है और सफाई व्यवस्था में कोई खास बदलाव दिखाई नहीं देता। इससे ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया गया कि शिकायत का उद्देश्य शौचालय की साफ-सफाई और वहां बनी अव्यवस्था को दूर कराना था। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग या कर्मचारियों की ओर से कार्रवाई किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि वास्तविक स्थिति में सुधार किए बिना ही इसे निपटा हुआ दिखा दिया गया।
ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद आमतौर पर संबंधित विभाग को मौके पर जाकर समस्या का समाधान करना होता है। इसके बाद कार्रवाई की जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जाती है। ऐसे में यदि मौके पर समस्या बरकरार है तो शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई नियमित रूप से होनी चाहिए। गंदगी रहने से आसपास के लोगों को परेशानी होती है और स्वच्छता व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की दोबारा जांच कराई जाए और संबंधित कर्मचारियों से पूछा जाए कि बिना वास्तविक सफाई के शिकायत को किस आधार पर निपटाया गया। साथ ही मौके की वर्तमान स्थिति की तस्वीर या निरीक्षण रिपोर्ट भी रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग की जा सकती है।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने बिना मौके पर कार्रवाई किए शिकायत को निपटाया है तो यह शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए गंभीर सवाल हो सकता है। इससे लोगों का ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।
मामले में यह भी जांच का विषय है कि 15 अगस्त को शिकायत दर्ज होने के बाद अगले तीन दिनों में किस अधिकारी या कर्मचारी ने इसे देखा और किस आधार पर समाधान दर्ज किया। यदि मौके पर निरीक्षण किया गया था तो उसकी रिपोर्ट और कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पोर्टल पर शिकायत को ‘समाधान’ दिखाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक समस्या दूर होने के बाद ही शिकायत का निस्तारण माना जाना चाहिए।
शौचालय में गंदगी की समस्या स्वास्थ्य और स्वच्छता से भी जुड़ी हुई है। यदि सार्वजनिक स्थान पर सफाई व्यवस्था खराब रहती है तो लोगों को असुविधा के साथ संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन की ओर से यदि शिकायत की दोबारा जांच कराई जाती है तो मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति दर्ज की जा सकती है। इसके आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ था या केवल रिकॉर्ड में ही मामला बंद किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि वह चाहता है कि संबंधित विभाग समस्या को गंभीरता से ले और मौके पर सफाई करवाए। साथ ही शिकायत को दोबारा खोलकर उचित कार्रवाई की जाए।
इस मामले ने ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था में फील्ड स्तर पर निगरानी की जरूरत को भी सामने ला दिया है। यदि शिकायतों का समाधान केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड में किया जाता है और मौके पर स्थिति नहीं बदली जाती, तो पूरी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल 15 अगस्त को दर्ज शिकायत को 18 अगस्त को निपटाया हुआ दिखाने और मौके पर गंदगी बरकरार रहने का आरोप सामने आया है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग मामले की दोबारा जांच करता है या नहीं और वास्तविक स्थिति सुधारने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
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