जींद जिले के हाट गांव में अधिवक्ता प्रवीण बूरा के साथ बिजली कर्मचारियों द्वारा कथित मारपीट के मामले में आंदोलन जारी है। धरना कमेटी ने शुक्रवार से शुरू हुई भूख हड़ताल को दो दिन और बढ़ाने का निर्णय लिया है। कमेटी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से मामले में संज्ञान लेने की अपील की है।
जिला प्रधान नवीन मलिक ने बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर रहे हैं। मलिक ने कहा कि प्रशासन और पुलिस को प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए। मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन का आह्वान कर उसे तेज करने की चेतावनी दी।
धरना कमेटी के अनुसार, प्रदर्शन शुरू हुए करीब 15 दिन बीतने के बावजूद कार्रवाई को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। कमेटी ने भूख हड़ताल की अवधि बढ़ाकर विरोध जारी रखने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारी मामले में आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और गांव की बिजली व्यवस्था से जुड़ी मांगों पर अड़े हैं।
कमेटी की प्रमुख मांगों में अधिवक्ता पर हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी, हाट गांव के पावर हाउस स्टाफ का तबादला और गांव में रोजाना 22 घंटे बिजली आपूर्ति शामिल है। इन मांगों को लेकर ग्रामीण और समर्थक 20 सितंबर से पावर हाउस के सामने धरना दे रहे हैं। धरना स्थल पर लोगों की मौजूदगी बनी हुई है।
मामले की शुरुआत 16 सितंबर की रात की घटना से हुई थी। अधिवक्ता प्रवीण बूरा ने सफीदों पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह बिजली संबंधी शिकायत दर्ज कराने गांव के पावर हाउस गए थे। उनका आरोप है कि वहां बिजली कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने एसडीओ समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस मामले में आरोपी लाइनमैन रवि की गिरफ्तारी हो चुकी है। धरना कमेटी अब अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और अपनी बाकी मांगों को पूरा करने पर जोर दे रही है।
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