सफीदों (एस• के• मित्तल) : हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) जींद के सौजन्य में आज सफ़ीदों के गांव खेड़ाखेमावती में महिला किसानों के लिए प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें 100 से अधिक महिला किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकी जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र, प्रशिक्षण सलाहकार ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों- जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीटनाशकों तथा मल्चिंग जैसी तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं ठान लें तो वें अपने परिवार की रसोई को पूरी तरह जहरमुक्त बना सकती हैं। उन्होंने बताया कि घर के आसपास की छोटी भूमि पर भी प्राकृतिक तरीके से सब्जियां, मसाले व फल आदि उगा कर परिवार को सुरक्षित और पोषक भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, कृषि विशेषज्ञ डॉ. नीतम मलिक ने प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, रसायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों की लागत कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती में लागत कम और लाभ अधिक हो सकता है, साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह अत्यंत लाभकारी है।
प्रशिक्षण के दौरान एफएमटी महिला किसान सुमित्रा रानी द्वारा महिला किसानों को बताया गया कि वें मूल्य संवर्धन एवं संस्करण के माध्यम से अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं जैसे – अचार, मुरब्बा, आंवला कैंडी, हल्दी पाउडर, सरसों का तेल, बासमती चावल, मसाले, दालों व शहद आदि जैसे जैविक उत्पादों की पैकिंग कर छोटा उद्यम शुरू करके अच्छा रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे और अपने अनुभव सांझा किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, जैविक खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ाने तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से रोजगार के लिए प्रेरित करना रहा ताकि ग्रामीण क्षेत्र में स्वस्थ भोजन, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर आय का मार्ग प्रशस्त हो सके।
![]()











