पानीपत थर्मल की तीन यूनिटों के उत्सर्जन पर NGT ने मांगा जवाब, 5 जनवरी को अगली सुनवाई

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Panipat

पानीपत थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट 6, 7 और 8 से सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। पर्यावरण कार्यकर्ता वरुण गुलाटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रिंसिपल बेंच ने हरियाणा सरकार और पावर स्टेशन प्रशासन सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 5 जनवरी 2027 को होगी।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि तीनों यूनिटों से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन निर्धारित 600 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर की सीमा से अधिक हो रहा है। याचिका में आसपास की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, उत्सर्जन नियंत्रित करने के लिए ड्राई सोर्बेंट इंजेक्शन यानी DSI तकनीक उपलब्ध है, लेकिन पावर स्टेशन में इसे स्थापित नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीक अपनाने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है। याचिका में कहा गया है कि अनुपालन की समय सीमा 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ाए जाने के बावजूद काम शुरू नहीं होने से समय पर इसे पूरा करने को लेकर सवाल उठते हैं।

ट्रिब्यूनल ने 28 सितंबर 2026 के आदेश में याचिकाकर्ता को सभी प्रतिवादियों तक नोटिस पहुंचाने का निर्देश दिया है। नोटिस की तामील से संबंधित हलफनामा अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले दाखिल करना होगा। संबंधित पक्षों के जवाब आने के बाद उत्सर्जन और नियंत्रण व्यवस्था की स्थिति पर आगे सुनवाई होगी।

इस बीच, CREA की ओर से CPCB के आंकड़ों पर आधारित जुलाई की रिपोर्ट में पानीपत का औसत PM2.5 स्तर 75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बताया गया था। रिपोर्ट में पानीपत देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में छठे स्थान पर रहा। हालांकि, PM2.5 की यह रिपोर्ट और थर्मल स्टेशन के सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन का मामला अलग मापदंडों से जुड़े हैं। थर्मल स्टेशन के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर प्रतिवादियों का जवाब अभी आना बाकी है।

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