हरियाणा के रोहतक में नाबालिग से रेप के मामले में अदालत ने 7 आरोपियों को बरी कर दिया। मामले में आरोपी करीब 6 साल तक जेल में रहे। सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सका। इसके बाद सभी आरोपियों को मामले में बरी कर दिया गया।
मामला करीब छह साल पहले सामने आया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया। बचाव पक्ष ने आरोपियों की ओर से अपना पक्ष रखते हुए अभियोजन के दावों और साक्ष्यों पर सवाल उठाए।
अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद अदालत ने सातों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि आरोपियों ने मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान करीब 6 साल जेल में बिताए। अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें मामले में बरी कर दिया गया है।
अदालत का फैसला यह स्पष्ट करता है कि किसी आपराधिक मामले में केवल आरोप लगना पर्याप्त नहीं होता। अभियोजन पक्ष को आरोपों को कानूनी मानकों के अनुरूप ठोस साक्ष्यों के जरिए साबित करना होता है। यदि आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं तो अदालत आरोपी को दोषी नहीं ठहरा सकती।
हालांकि, नाबालिग से जुड़े यौन अपराध का मामला होने के कारण यह बेहद संवेदनशील केस था। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
फिलहाल 7 आरोपियों के बरी होने के बाद यह मामला चर्चा में है। करीब छह साल जेल में रहने के बाद आरोपियों को अदालत से राहत मिली है। यदि फैसले के खिलाफ संबंधित पक्ष उच्च अदालत का रुख करता है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी के अनुसार चलेगी।
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