हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया की ओर से दायर याचिका पर हुई। कोर्ट ने सरकार को सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों पर विचार कर उन्हें पूरा करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से चल रहे विरोध के कारण नगर निकायों के सामने भी सफाई व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है।
सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और हड़ताल से पैदा हुई स्थिति को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में कर्मचारियों की मांगों और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से कर्मचारियों की जायज मांगों पर उचित कार्रवाई करने को कहा। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार और संबंधित विभागों के सामने कर्मचारियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
सफाई कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से विभिन्न मांगें उठाई जा रही हैं। इनमें रोजगार की सुरक्षा, नियमितीकरण, वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया जा सकता है।
हड़ताल का सीधा असर शहरी सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर कचरा नियमित रूप से नहीं उठने के कारण सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे स्थानीय निकायों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक हित से जुड़े सफाई कार्यों को भी सुचारु बनाए रखने की जरूरत है।
सिरसा सहित प्रदेश के अन्य शहरों में सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। लोगों का कहना है कि हड़ताल लंबी खिंचने पर स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में सरकार और कर्मचारियों के बीच जल्द बातचीत होना जरूरी है।
विधायक गोकुल सेतिया की याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले में न्यायिक स्तर पर भी सरकार की जवाबदेही तय हुई है। अब संबंधित विभागों को अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।
कर्मचारी संगठनों की ओर से भी सरकार से उनकी मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन की मांग की जा सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन के बजाय मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों की मांगों और आम जनता की सफाई संबंधी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है। सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं, इसलिए समाधान में देरी से बचना जरूरी माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार इस मामले में तेजी से कदम उठाएगी। यदि कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच सहमति बनती है तो हड़ताल समाप्त होने और सफाई व्यवस्था सामान्य होने का रास्ता खुल सकता है।
मामले में आगे की कार्रवाई सरकार के रुख और कर्मचारी संगठनों के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब सभी की नजर सरकार की अगली पहल पर है।
फिलहाल सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी मांगों का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने सरकार को जायज मांगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिससे कर्मचारियों को समाधान की उम्मीद जगी है।
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