IAS सोनल गोयल ने युवाओं को बताया सफलता का रास्ता, बोलीं- नाकामी को सीख में बदलें

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IAS Sonal Goel

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं सोनल गोयल ने युवाओं को सफलता का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता आना स्वाभाविक है, लेकिन उससे घबराने के बजाय उसकी वजह समझकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका संदेश है कि लगातार प्रयास, अनुशासन और सकारात्मक सोच सफलता की राह आसान बनाते हैं।

सोनल गोयल हरियाणा में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं और झज्जर की उपायुक्त के पद पर भी सेवाएं दे चुकी हैं। प्रशासनिक क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, युवाओं और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर भी सक्रियता दिखाई है।

युवाओं से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या करियर की तैयारी में तुरंत सफलता नहीं मिलती। कई बार मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं आता। ऐसी स्थिति में निराश होने के बजाय अपनी कमियों की पहचान कर रणनीति में बदलाव करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि असफलता को अंतिम परिणाम नहीं मानना चाहिए। हर असफल प्रयास व्यक्ति को अपनी तैयारी और कार्यशैली को बेहतर करने का अवसर देता है। यदि कोई उम्मीदवार अपनी गलतियों का विश्लेषण करता है और उनसे सीखता है तो अगली कोशिश में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना बढ़ जाती है।

IAS सोनल गोयल ने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित करके तैयारी करने की सलाह दी। उनका कहना है कि बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए उसे छोटे-छोटे चरणों में बांटना उपयोगी होता है। इससे तैयारी व्यवस्थित रहती है और प्रगति का आकलन भी किया जा सकता है।

उन्होंने अनुशासन को सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार रोजाना थोड़ी-थोड़ी मेहनत लंबे समय में बड़ा परिणाम दे सकती है। तैयारी के दौरान निरंतरता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि केवल कुछ दिनों तक मेहनत करने से किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होता है।

सोनल गोयल ने समय प्रबंधन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। पढ़ाई, आराम और अन्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाकर चलने से मानसिक दबाव कम किया जा सकता है।

उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया और अनावश्यक गतिविधियों में समय बर्बाद करने से बचने की अपील की। उनका कहना है कि लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सफलता का कोई एक निश्चित फार्मूला नहीं होता। हर व्यक्ति की परिस्थितियां और क्षमताएं अलग होती हैं। इसलिए दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी प्रगति पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक सेवा में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में भी चुनौतियां लगातार आती रहती हैं। किसी समस्या का समाधान तुरंत न मिलने पर निराश होने के बजाय उसके विभिन्न पहलुओं को समझकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच रखने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया। उनके अनुसार लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, यदि व्यक्ति लगातार प्रयास करता रहे तो उसे हासिल करने की संभावना बनी रहती है।

सोनल गोयल ने कहा कि परिवार, शिक्षक और अच्छे मार्गदर्शकों का सहयोग भी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। सही मार्गदर्शन से तैयारी की दिशा तय करने और गलतियों को समय रहते सुधारने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता को समझकर करियर का चुनाव करने की सलाह दी। केवल सामाजिक दबाव या दूसरों को देखकर करियर तय करने के बजाय अपने लक्ष्य और रुचि को प्राथमिकता देना चाहिए।

उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है जितनी पढ़ाई। परीक्षा में एक या दो प्रयासों में सफलता न मिलने पर भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।

सोनल गोयल की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी 13वीं रैंक और प्रशासनिक सेवा का अनुभव यह संदेश देता है कि निरंतर मेहनत और सही रणनीति से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलता से डरने की जरूरत नहीं है। असफलता से मिलने वाली सीख को अगली कोशिश की ताकत बनाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि जो युवा धैर्य और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य पर टिके रहते हैं, वे आगे बढ़ने में जरूर सफल होंगे।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने भी उनके अनुभवों और सुझावों में रुचि दिखाई। उनके सफलता मंत्र ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत और आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश दिया।

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