पानीपत में बैंक लोन की रिकवरी से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पानीपत के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिए हैं कि बैंक को बंधक रखी गई संपत्ति का कब्जा दिलाने की प्रक्रिया तय समय में पूरी कराई जाए।
मामला बैंक की ओर से बकाया कर्ज की वसूली से जुड़ा बताया जा रहा है। बैंक ने कर्ज की राशि की रिकवरी के लिए बंधक संपत्ति पर कब्जा लेने की कार्रवाई की मांग की थी। निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद कार्रवाई में देरी होने पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में प्रशासनिक स्तर पर हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताई। अदालत ने पानीपत के DC और SP को निर्देश दिया कि संबंधित बैंक को बंधक संपत्ति का कब्जा दिलाने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
हाईकोर्ट ने इसके लिए 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की है। आदेश के अनुसार संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को तय अवधि के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
बैंकिंग व्यवस्था में कर्ज लेने के बाद संपत्ति को सुरक्षा के तौर पर बंधक रखा जाना सामान्य प्रक्रिया है। यदि कर्ज की अदायगी नहीं होती तो संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैंक बंधक संपत्ति पर कब्जा लेकर बकाया राशि की वसूली की कार्रवाई कर सकता है।
ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, खासकर तब जब बैंक को संपत्ति का भौतिक कब्जा दिलाने के लिए सरकारी सहायता की आवश्यकता होती है।
इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने स्पष्ट समय सीमा तय कर दी है। अब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को अदालत के निर्देश के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कोर्ट के आदेश के बाद बैंक को उम्मीद है कि बंधक संपत्ति का कब्जा निर्धारित अवधि के भीतर मिल सकेगा। इससे बैंक की रिकवरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वहीं, संपत्ति से जुड़े व्यक्ति या पक्ष के लिए भी अदालत का आदेश महत्वपूर्ण है। बंधक संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही की जानी होगी।
मामले में प्रशासन को संपत्ति की पहचान, संबंधित दस्तावेजों और कब्जे की कार्रवाई से जुड़े आवश्यक पहलुओं की जांच करनी होगी। पुलिस को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सहयोग देना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट का यह आदेश ऐसे मामलों में प्रशासनिक देरी को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने तय समय सीमा के जरिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी है।
बैंकिंग क्षेत्र में बकाया ऋण की वसूली एक महत्वपूर्ण विषय है। लंबे समय तक रिकवरी की प्रक्रिया अटकने से बैंक की वित्तीय स्थिति और ऋण प्रबंधन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के तहत समय पर कार्रवाई जरूरी मानी जाती है।
इस मामले में 30 दिन की समय सीमा पूरी होने के बाद कार्रवाई की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। संबंधित अधिकारियों को अदालत के निर्देश के अनुपालन की रिपोर्ट देनी पड़ सकती है।
स्थानीय स्तर पर भी इस आदेश को लेकर चर्चा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और पुलिस को अब मामले में तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद पानीपत प्रशासन के सामने बंधक संपत्ति का कब्जा बैंक को दिलाने की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करने की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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