तिजारा चेयरमैन चुनाव से पहले हरियाणा में सियासी घमासान, कांग्रेस समर्थित 18 पार्षदों को रोकने का आरोप; पिंजौर थाने पर धरना

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Tijara Chairman Election

पंचकूला : राजस्थान के तिजारा नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव से ठीक पहले हरियाणा में सियासी हलचल तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय समेत करीब 18 पार्षदों को रविवार रात पंचकूला के चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोक लिया गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और पार्षदों के परिजनों ने पिंजौर थाने के बाहर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कांग्रेस की ओर से इन पार्षदों को चुनाव से पहले हिमाचल प्रदेश में एक साथ रखा गया था। रविवार रात पार्षद राजस्थान के तिजारा लौट रहे थे। कांग्रेस नेता इमरान खान का दावा है कि रात करीब 9 बजे उनका काफिला जैसे ही हरियाणा की सीमा में चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास पहुंचा, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने बस और अन्य गाड़ियों को रोक लिया।

इमरान खान ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मी ऐसी गाड़ियों में पहुंचे थे, जिन पर नंबर प्लेट नहीं थी या नंबर प्लेट ढकी हुई थी। उनका दावा है कि पार्षदों को वाहनों से अलग कर अपने साथ ले जाया गया। हालांकि इन आरोपों पर पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

घटना की सूचना मिलने के बाद कांग्रेस के स्थानीय नेता और राजस्थान से पहुंचे पार्षदों के परिजन पिंजौर थाने पहुंचे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें पार्षदों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। सोमवार सुबह थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया गया और पुलिस से पार्षदों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार पार्षदों की बस और उनके साथ चल रही अन्य गाड़ियां पिंजौर थाने के पास खड़ी मिलीं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय चौहान ने दावा किया कि थाना प्रभारी की ओर से उन्हें बताया गया कि टोल प्लाजा के पास वाहन लावारिस स्थिति में मिले थे और उन्हें थाने लाया गया। पार्षद कहां हैं, इसे लेकर कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से जवाब मांगा है।

यह पूरा घटनाक्रम तिजारा नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव से कुछ घंटे पहले सामने आया। नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। चुनावी नतीजों में 31 निर्दलीय, तीन भाजपा और एक कांग्रेस प्रत्याशी पार्षद चुने गए हैं। सभापति चुनने के लिए 18 पार्षदों का समर्थन निर्णायक है।

कांग्रेस का दावा है कि उसके एक निर्वाचित पार्षद के साथ 17 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन है और इन्हीं करीब 18 पार्षदों को चुनाव से पहले हिमाचल प्रदेश में एक साथ रखा गया था। अब मतदान से पहले इन पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने के आरोप के बाद तिजारा की राजनीति गरमा गई है।

राजस्थान कांग्रेस के कई नेताओं ने भी घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि पार्षदों को मतदान में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि यह कांग्रेस नेताओं का आरोप है और इसके पीछे राजनीतिक दबाव होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पिंजौर से तिजारा की दूरी करीब 360 किलोमीटर होने के कारण कांग्रेस नेताओं ने पार्षदों के समय पर मतदान स्थल तक पहुंचने को लेकर भी चिंता जताई है।

फिलहाल कांग्रेस नेताओं का विरोध जारी है और वे पार्षदों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की मांग कर रहे हैं। पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पार्षदों को किस आधार पर रोका गया और उनकी मौजूदा स्थिति क्या है।

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