₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR का पेट्रोल डीलरों ने किया विरोध, बोले- राहत नहीं मिली तो डिजिटल भुगतान करेंगे बंद

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UPI MDR

हिसार : पेट्रोल पंपों पर 2 हजार रुपए से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर हरियाणा के पेट्रोलियम डीलरों ने विरोध जताया है। ऑल हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि यदि पेट्रोल पंपों को इस तरह के शुल्क से राहत नहीं मिली तो प्रदेश में डिजिटल भुगतान की सुविधा बंद कर केवल नकद भुगतान स्वीकार करने जैसे कदम पर विचार किया जा सकता है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था अभी पूरी तरह लागू नहीं हुई है। इसके बावजूद डीलरों ने प्रस्तावित शुल्क का विरोध शुरू कर दिया है। 17 सितंबर को वित्त मंत्रालय को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजकर पेट्रोल पंपों को MDR से पूरी तरह मुक्त रखने की मांग की गई।

हिसार पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रधान राजकुमार सलेमगढ़ का कहना है कि पेट्रोल पंप का कारोबार बेहद कम मार्जिन पर चलता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से डीलरों की लागत बढ़ेगी।

डीलर्स का दावा है कि उन्हें प्रति लीटर डीजल पर करीब 2 रुपए और पेट्रोल पर करीब 3 रुपए का मार्जिन मिलता है। एसोसिएशन ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई ग्राहक 2,100 रुपए का पेट्रोल यूपीआई के माध्यम से खरीदता है और उस ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए का अतिरिक्त शुल्क डीलर को देना पड़ता है तो इसका सीधा असर उसके मार्जिन पर पड़ेगा।

एसोसिएशन का कहना है कि बड़ी संख्या में ग्राहक अब पेट्रोल पंपों पर यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान करते हैं। ऐसे में प्रत्येक पात्र ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से दिनभर में डीलर पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।

डीलरों के मुताबिक इसका सबसे ज्यादा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों और हाईवे के किनारे स्थित कम बिक्री वाले पेट्रोल पंपों पर पड़ सकता है। ऐसे पंपों की कुल बिक्री अपेक्षाकृत कम होती है और अतिरिक्त ट्रांजैक्शन लागत उनके संचालन खर्च को प्रभावित कर सकती है।

एसोसिएशन ने मांग की है कि पेट्रोल पंपों को 2 हजार रुपए से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर किसी भी प्रस्तावित MDR शुल्क से पूरी छूट दी जाए। इसके साथ ही फ्यूल सेक्टर में जीरो-MDR व्यवस्था जारी रखने की मांग भी की गई है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी पत्र भेजे जाने की बात कही गई है। इसमें डीलरों ने कहा है कि वे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का समर्थन करते हैं, लेकिन कम मार्जिन वाले ईंधन कारोबार में अतिरिक्त ट्रांजैक्शन खर्च वहन करना मुश्किल होगा।

डीलरों ने आशंका जताई है कि यदि अतिरिक्त शुल्क का बोझ पेट्रोल पंप संचालकों पर डाला गया तो डिजिटल भुगतान को लेकर उनका रुख बदल सकता है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि राहत नहीं मिलने की स्थिति में हरियाणा के पेट्रोल पंप डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर नकद लेन-देन की ओर लौट सकते हैं।

फिलहाल एसोसिएशन ने अपनी आपत्तियां और मांगें केंद्र सरकार के सामने रखी हैं। डीलरों की ओर से जिस MDR व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है, उसे अभी लागू व्यवस्था के बजाय प्रस्तावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अंतिम नियम और उसका फ्यूल रिटेल कारोबार पर प्रभाव सरकार अथवा संबंधित भुगतान संस्थाओं की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।

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