गुरुग्राम के युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में शव की पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। परिवार का आरोप है कि शव मिलने के बाद जानकारी अंतरराज्यीय पुलिस डेटाबेस ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं की गई। पहचान का अवसर मिलने से पहले ही शव को अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें लापता व्यक्तियों और अज्ञात शवों से जुड़े मामलों के लिए देशभर में समान मानक संचालन प्रक्रिया बनाने की मांग की गई है। अदालत ने दिल्ली और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नरों से व्यक्तिगत हलफनामे मांगे हैं।
मामले के जांच अधिकारी एएसआई साहून खान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। डीसीपी साउथ आयुष यादव के अनुसार इंस्पेक्टर और फॉरेंसिक यूनिट के अधिकारियों समेत कम से कम पांच अधिकारियों की भूमिका को लेकर कार्रवाई की तैयारी है। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर की भूमिका पर भी स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई की सिफारिश भेजने की बात कही गई है।
पुलिस ने अज्ञात शवों की पहचान के लिए नई निगरानी व्यवस्था बनाई है। एसीपी मुख्यालय को विशेष नोडल अधिकारी बनाया गया है। क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी जिम्मेदारी दी गई है, जो डीसीपी क्राइम को रिपोर्ट करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत अज्ञात शव मिलने पर गुरुग्राम कंट्रोल रूम दिल्ली तथा फरीदाबाद, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी और पलवल के कंट्रोल रूम से तत्काल जानकारी साझा करेगा। फोटो, हुलिया और अन्य विवरण के आधार पर गुमशुदगी के मामलों से मिलान किया जाएगा।
31 वर्षीय युवराज अडानी रियल्टी में सेल्स मैनेजर थे। वह 6 सितंबर को लापता हुए थे। 10 सितंबर को बादशाहपुर के पास उनका शव मिला और 14 सितंबर को अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार किया गया।
दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच के बाद पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में पैसों के विवाद में हत्या की बात सामने आई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डूबने की आशंका जताए जाने का पहलू भी समीक्षा में है।
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