सीजेएम अदालत का निर्णय; संपत्ति विवरण छिपाने पर महिला जिम्मेदार ठहराई गई
अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। चंडीगढ़ की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) अदालत ने एक महिला को न्यायालय में झूठा हलफनामा दाखिल करने के मामले में दोषी करार दिया है। आरोप था कि संबंधित महिला ने भूमि से जुड़े मामले में सभी तथ्यों का पूर्ण खुलासा नहीं किया और रिकॉर्ड में दूसरी संपत्ति का उल्लेख नहीं किया।
मामला उस समय प्रकाश में आया जब न्यायिक प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि प्रस्तुत शपथपत्र में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई गई थी। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास मानते हुए गंभीरता से लिया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिनसे स्पष्ट हुआ कि महिला के नाम पर या उससे संबंधित दूसरी जमीन का विवरण पहले दिए गए हलफनामे में दर्ज नहीं था। बचाव पक्ष की दलीलों के बावजूद अदालत ने माना कि तथ्यों को छिपाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायालय में झूठा हलफनामा देना न केवल अवमानना बल्कि दंडनीय अपराध भी है। इससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा अनिवार्य है।
अब सजा के निर्धारण को लेकर अगली सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले को कानूनी हलकों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अदालत में तथ्य छिपाना गंभीर परिणाम ला सकता है।
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