बुजुर्ग समाज के लिए अनुभवों का खजाना है: प्रो. ई.वी. गिरीश
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज के सेवा प्रभाग के तत्वावधान में नगर के संजय रोज गार्डन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा एक विशेष आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम संगम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन सेंटर इंचार्ज बहन स्नेहलता ने किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता मुंबई से अंतर्राष्ट्रीय प्रेरक वक्ता प्रो. ई.वी. गिरीश ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर वीरेंद्र भाईजी भी मौजूद रहे। वहीं भक्ति योग आश्रम सरनाखेड़ी के संचालक डॉ. शंकरानंद सरस्वती महाराज का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ।
इसके साथ-साथ बहन रजनी, बहन सारिका व बहन कीर्ति विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत में बहन स्नेहलता ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया। वहीं कार्यक्रम के दौरान नगर के बुजुर्गों का विशेष रूप से सम्मान किया गया। अपने स्वागत भाषण में बहन स्नेहलता ने बताया कि प्रो. गिरीश पिछले 29 वर्षों से ब्रह्माकुमारीज संस्था से जुड़े हुए हैं और देश-विदेश में आध्यात्मिकता, जीवन प्रबंधन तथा सकारात्मक सोच के विषय में लोगों का मार्गदर्शन कर चुके हैं। उनका सफीदों आगमन क्षेत्र के लिए अत्यंत सौभाग्यपूर्ण है। अपने संबोधन में प्रो. ई.वी. गिरीश शिरकत ने कहा कि बुजुर्ग केवल परिवार के सदस्य नहीं होते, बल्कि वे समाज के लिए अनुभवों का खजाना हैं। उनके पास जीवन के अनमोल अनुभव होते हैं, जो नई पीढ़ी को सही दिशा दिखा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राजयोग और सकारात्मक सोच के माध्यम से वृद्धावस्था में आने वाले अकेलेपन और तनाव को दूर किया जा सकता है। बुजुर्गों को जीवन के इस पड़ाव को बोझ नहीं, बल्कि गर्व के साथ जीने का अवसर समझना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि व्यक्ति शरीर की आयु से नहीं, बल्कि अपने मन की स्थिति से युवा या वृद्ध होता है। यदि मन में उमंग, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा हो तो किसी भी उम्र में जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। प्रो. गिरीश ने भारतीय संस्कृति की प्राचीन वानप्रस्थ परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन के अंतिम चरण को आत्मचिंतन, समाज सेवा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित करना चाहिए। उन्होंने दादा-दादी और पोते-पोतियों के बीच स्नेहपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने कार्यक्रम के मौजूद युवाओं को भी संदेश दिया कि वे अपने बुजुर्गों के अनुभवों का सम्मान करें और उनसे सीख लेकर अपने जीवन को बेहतर बनाएं। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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