नागक्षेत्र सरोवर में फिर मरी मछलियां जल संकट से तड़प रहे जीव, प्रशासन पर उठे सवाल

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Nagakshetra Sarovar,

सफीदों (एस• के• मित्तल) : सफीदों का ऐतिहासिक और महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर एक बार फिर गंभीर संकट से जूझ रहा है। बुधवार सुबह सरोवर में बड़ी संख्या में मछलियां मृत अवस्था में पाई गईं, जबकि कई मछलियां पानी में तड़पती नजर आईं। इस दर्दनाक दृश्य को सबसे पहले एक श्रद्धालु ने देखा, जिसने तुरंत मंदिर कमेटी और प्रशासन को इसकी सूचना दी। यह पहला मौका नहीं है जब नागक्षेत्र सरोवर में इस तरह की स्थिति बनी हो। इससे पहले भी यहां मछलियों की मौत हो चुकी है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, सरोवर का पानी अत्यधिक दूषित हो चुका है और उसमें अमोनिया की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। इसका सबसे बड़ा कारण ताजा पानी की आपूर्ति का पूरी तरह बंद हो जाना है। बता दें कि वर्षों से हांसी ब्रांच नहर से नागक्षेत्र सरोवर में पानी आता था, जिससे सरोवर का जलस्तर संतुलित रहता था और पानी लगातार बदलता रहता था। इससे जलीय जीवों को स्वच्छ वातावरण मिलता था। लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से नहर से सरोवर तक पानी पहुंचाने वाला नाला बंद पड़ा हुआ है। कुछ समय पहले स्थानीय समाजसेवियों और प्रशासन के सहयोग से अस्थायी रूप से पंप लगाकर सरोवर में पानी डलवाया गया था, जिससे स्थिति में सुधार आया था। लेकिन नहर बंद होने के बाद पंप हटा लिया गया और समस्या फिर से गहरा गई। अब जबकि नहर में दोबारा पानी आया है, तब भी सरोवर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। भीषण गर्मी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। लगातार गिरते जलस्तर और बढ़ते तापमान के कारण पानी गर्म और जहरीला होता जा रहा है, जिससे मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाता, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। लोगों ने मांग की है कि नहर से सरोवर तक पानी की नियमित आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए। जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक अस्थायी पंप के जरिए पानी डाला जाए और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। अखिल भारतीय ब्राह्मण संसद के अध्यक्ष संजीव गौतम ने कहा कि बार-बार अधिकारियों को अवगत कराने और विधायक रामकुमार गौतम के निर्देशों के बावजूद नहरी विभाग ने पानी की मोरी का निर्माण नहीं किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि मोरी का निर्माण तुरंत कराया जाए ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि नागक्षेत्र सरोवर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि हजारों जलीय जीवों का जीवन आधार है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह पवित्र सरोवर एक गंभीर पर्यावरणीय संकट का शिकार हो सकता है।

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