कॉमनवेल्थ खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाली हरियाणा की खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2022 कॉमनवेल्थ के बाद उन्होंने खेल छोड़ने का मन बना लिया था। आर्थिक और मानसिक चुनौतियों के बीच वह अपने करियर को आगे बढ़ाने को लेकर असमंजस में थीं, लेकिन परिवार के सहयोग और विश्वास ने उन्हें दोबारा मजबूती से खड़ा कर दिया।
शर्मिला ने बताया कि जब उन्होंने खेल छोड़ने की बात घर में कही तो उनकी मां ने उन्हें हिम्मत देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो वह अपने हिस्से की जमीन भी बेच देंगी, लेकिन बेटी का सपना अधूरा नहीं रहने देंगी। मां के इन शब्दों ने उन्हें आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दी।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति ने भी उनके करियर को प्राथमिकता देते हुए बड़ा त्याग किया। पति ने उनकी तैयारी और फोकस में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए अपनी दुकान छोड़ दी और हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार के इस सहयोग ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।
शर्मिला का कहना है कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे केवल उसकी मेहनत ही नहीं, बल्कि परिवार का त्याग और विश्वास भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि कठिन समय में हार न मानें और अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करते रहें।
उनकी संघर्षभरी यात्रा आज हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि शर्मिला जैसी खिलाड़ियों की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और परिवार के समर्थन से बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।
फिलहाल शर्मिला धनखड़ का लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर देश के लिए और अधिक पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी भारत का नाम विश्व मंच पर रोशन करने के लिए पूरी मेहनत से तैयारी जारी रखेंगी।
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