दादी के श्रद्धा कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं मनु भाकर, एशियन गेम्स के लिए जापान में; भारतीय जर्सी में साझा की तस्वीर

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Manu Bhaker

झज्जर : हरियाणा की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर इन दिनों जापान में हैं, जहां वह आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इसी बीच उनके पैतृक गांव गोरिया में शुक्रवार को उनकी दादी का श्रद्धा कार्यक्रम आयोजित किया गया। जापान में होने के कारण मनु इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं।

मनु भाकर की दादी का 8 सितंबर को निधन हो गया था। दादी के निधन की सूचना मिलने के बाद मनु अपने पैतृक गांव पहुंची थीं और अंतिम संस्कार में शामिल हुई थीं। इसके बाद उन्हें आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए जापान रवाना होना पड़ा।

शुक्रवार को परिवार और ग्रामीणों की मौजूदगी में दादी का श्रद्धा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। मनु के जापान में होने के कारण वह कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाईं।

जापान पहुंचने के बाद मनु भाकर ने भारतीय जर्सी में अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने अपने संदेश में खेल के साथ एक दशक से अधिक के सफर का जिक्र किया। मनु ने कहा कि इतने वर्षों बाद भी भारतीय जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करने से मिलने वाला गर्व, उत्साह और सम्मान उनके लिए पहले जैसा ही है।

मनु की दादी उनके खेल सफर की लंबे समय से साक्षी रही थीं। परिवार के मुताबिक वह अपनी पोती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करते देखना चाहती थीं। दादी के निधन के बाद मनु ने उनके साथ बिताए पलों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की थीं।

मनु भाकर झज्जर जिले के गोरिया गांव से ताल्लुक रखती हैं और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में भारत के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ओलंपिक में पदक जीतकर वह पहले ही देश और हरियाणा का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन कर चुकी हैं।

अब वह एक बार फिर भारतीय टीम की ओर से बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतर रही हैं। एक तरफ पैतृक गांव में परिवार दादी की स्मृतियों के साथ श्रद्धा कार्यक्रम में शामिल हुआ, वहीं दूसरी ओर मनु जापान में भारतीय जर्सी पहनकर अपनी खेल जिम्मेदारी निभा रही हैं।

परिवार के लिए यह समय भावनात्मक है। दादी के निधन के कुछ ही दिनों बाद मनु को देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए जापान जाना पड़ा। ऐसे में वह श्रद्धा कार्यक्रम में मौजूद नहीं हो सकीं, लेकिन दादी की यादों के साथ अपने खेल अभियान में आगे बढ़ रही हैं।

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