हरियाणा की एक प्रसिद्ध रागनी गायिका अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। वह अपनी 90 वर्षीय सास को विशेष सीट पर बैठाकर करीब 250 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा कर रही हैं। उनकी इस अनूठी श्रद्धा और सेवा भावना की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं।
रागनी गायिका ने बताया कि भगवान शिव के प्रति आस्था और अपनी सास की सेवा, दोनों उनके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने इस बार की कांवड़ यात्रा में अपनी बुजुर्ग सास को भी साथ ले जाने का निर्णय लिया। यात्रा के दौरान श्रद्धालु जगह-जगह उनका स्वागत कर रहे हैं और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने कठिन धार्मिक यात्रा की हो। इससे पहले वह 84 कोस की परिक्रमा भी पूरी कर चुकी हैं। उनका कहना है कि धार्मिक यात्राएं उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती हैं।
यात्रा के दौरान वह नियमित रूप से विश्राम, भोजन और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का भी ध्यान रख रही हैं ताकि उनकी सास को किसी प्रकार की परेशानी न हो। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल आस्था ही नहीं, बल्कि परिवार के प्रति समर्पण और बुजुर्गों के सम्मान का भी संदेश देती है।
रास्ते में कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने उनकी सेवा भावना की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि इस तरह की पहल परिवार और संस्कारों का मजबूत संदेश देती है।
फिलहाल उनकी कांवड़ यात्रा जारी है। श्रद्धालु उनकी सुरक्षित यात्रा और सफल जलाभिषेक की कामना कर रहे हैं। उनकी यह अनूठी यात्रा सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
![]()











