हरियाणा के पानीपत में सावन की पहली तेज बारिश ने औद्योगिक क्षेत्रों की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल दी। कई औद्योगिक इकाइयों में बारिश का पानी भर जाने से उत्पादन प्रभावित हो गया। फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि जलभराव के कारण एक्सपोर्ट के लिए तैयार माल खराब हो गया, जबकि कई मशीनों को भी बंद करना पड़ा।
उद्योगपतियों के अनुसार, लगातार हुई बारिश के बाद फैक्ट्रियों के अंदर और बाहर पानी भर गया। जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से पानी लंबे समय तक जमा रहा, जिससे उत्पादन कार्य पूरी तरह प्रभावित हुआ। कई इकाइयों में बिजली आपूर्ति और मशीन संचालन भी रोकना पड़ा।
फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि तैयार माल के खराब होने से लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। विशेष रूप से एक्सपोर्ट के लिए तैयार उत्पाद समय पर भेजना मुश्किल हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऑर्डरों पर भी असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि यदि जल्द जल निकासी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो नुकसान और बढ़ सकता है।
औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान इसी तरह की स्थिति बनती है, जिससे उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। संबंधित विभागों को जल निकासी तेज करने और प्रभावित इलाकों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
फिलहाल कई फैक्ट्रियों में उत्पादन कार्य आंशिक या पूरी तरह से प्रभावित है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि जलभराव खत्म होने के बाद जल्द उत्पादन सामान्य हो सकेगा और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
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