शिव महापुराण कथा में गूंजा शिव-सती विवाह का प्रसंग कथा श्रवण से मिलता है आध्यात्मिक लाभ: अरविंद शास्त्री

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Shiv Mahapuran
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के गीता मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की महिमा, आराधना और माता सती एवं भगवान शिव के विवाह का दिव्य प्रसंग श्रवण किया। कथा व्यास अरविंद शास्त्री ने श्रद्धालुओं को शिव महापुराण के विभिन्न प्रसंगों से अवगत कराते हुए भगवान शंकर की पूजा-अर्चना और कथा श्रवण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक कथा का आनंद लिया। कथा व्यास अरविंद शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव की आराधना मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ जीवन में सकारात्मकता का संचार करती है। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण केवल भगवान शिव की कथाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि इसमें जीवन को सद्मार्ग पर ले जाने वाले अनेक संदेश भी समाहित हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की पूजा करने तथा शिव कथा का श्रवण करने से मनुष्य के भीतर भक्ति और सद्भाव की भावना मजबूत होती है। पूजा का मूल आधार श्रद्धा, नियम और सात्विक भावना है। कथा के दौरान अरविंद शास्त्री ने माता सती और भगवान शिव के विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं, जबकि माता सती आदि शक्ति का स्वरूप हैं। दोनों का विवाह शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि देवताओं के लिए भगवान शिव और माता सती का मिलन अत्यंत महत्वपूर्ण था। कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने कामदेव को भगवान शिव के पास भेजकर उन्हें गृहस्थ जीवन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया। इसके बाद देवताओं के निवेदन और परिस्थितियों के अनुसार शिव माता सती से विवाह के लिए तैयार हुए। कथा व्यास ने कहा कि शिव और शक्ति का संबंध सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है। शिव के बिना शक्ति और शक्ति के बिना शिव की कल्पना अधूरी मानी जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा सत्य, संयम, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस मौके पर राजेश गोयल, संदीप गर्ग, निशांत कंसल, शिवकुमार गर्ग, महावीर तायल और साधूराम तायल सहित अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से मौजूद रहे।

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