गुरुग्राम की सोसाइटी लिफ्ट में 15 मिनट फंसा बच्चा, मेड के साथ हुआ बंद; मेंटेनेंस टीम ने बचाया

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Gurugram News

गुरुग्राम की एक सोसाइटी में लिफ्ट अचानक खराब होने से एक बच्चा और उसके साथ मौजूद मेड करीब 15 मिनट तक अंदर फंसे रहे। लिफ्ट के बीच में अटक जाने से बच्चे और मेड के बीच घबराहट की स्थिति बन गई। सूचना मिलने के बाद सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम मौके पर पहुंची और लिफ्ट का दरवाजा खोलकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।

घटना के बाद सोसाइटी के निवासियों में लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई। परिजनों ने मामले की जांच कराने और लिफ्ट के रखरखाव में किसी तरह की लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि बच्चा मेड के साथ लिफ्ट में सवार हुआ था। कुछ समय बाद लिफ्ट अचानक रुक गई और दोनों अंदर फंस गए। लिफ्ट के रुकने के बाद बच्चे के परिजन और सोसाइटी के अन्य लोगों को घटना की जानकारी मिली।

करीब 15 मिनट तक लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुला। इस दौरान अंदर फंसे बच्चे और मेड को बाहर निकालने के लिए सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम को बुलाया गया।

टीम ने मौके पर पहुंचकर लिफ्ट को सुरक्षित तरीके से खोलने की कोशिश की। इसके बाद दरवाजा खोला गया और बच्चे तथा मेड को बाहर निकाल लिया गया।

बाहर आने के बाद बच्चे को परिजनों के पास पहुंचाया गया। घटना के दौरान बच्चा काफी घबराया हुआ बताया जा रहा है। परिवार ने लिफ्ट की तकनीकी खराबी की जांच कराने की मांग की है।

सोसाइटी में रहने वाले लोगों का कहना है कि लिफ्ट जैसी जरूरी सुविधा में इस तरह की खराबी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। उनका कहना है कि लिफ्ट की नियमित सर्विसिंग और सुरक्षा जांच समय पर होनी चाहिए।

परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मेंटेनेंस टीम समय पर नहीं पहुंचती तो बच्चा और मेड अधिक देर तक लिफ्ट में फंसे रह सकते थे। उन्होंने लिफ्ट के रखरखाव और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की जांच की मांग की है।

घटना के बाद सोसाइटी प्रबंधन से लिफ्ट की तकनीकी स्थिति की जानकारी मांगी जा रही है। यह पता लगाने की जरूरत है कि लिफ्ट अचानक क्यों रुकी और उसमें किस तरह की खराबी आई थी।

लिफ्ट में इमरजेंसी अलार्म, इंटरकॉम या अन्य सुरक्षा उपकरण ठीक से काम कर रहे थे या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है। ऐसे उपकरण आपात स्थिति में अंदर फंसे लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

सोसाइटी के निवासियों ने मांग की है कि सभी लिफ्टों की तकनीकी जांच कराई जाए। किसी भी लिफ्ट में खराबी मिलने पर उसे ठीक किए जाने तक इस्तेमाल से रोका जाना चाहिए।

मेंटेनेंस टीम की ओर से बच्चे और मेड को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई। हालांकि घटना ने सोसाइटी की लिफ्ट सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, लिफ्ट में फंसने की स्थिति में घबराने के बजाय इमरजेंसी अलार्म या इंटरकॉम के जरिए मदद मांगनी चाहिए। लिफ्ट के दरवाजे को जबरन खोलने या बाहर निकलने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है।

सोसाइटी प्रबंधन से उम्मीद की जा रही है कि घटना की पूरी जांच कराई जाएगी और तकनीकी खराबी के कारणों का पता लगाया जाएगा। यदि रखरखाव में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल बच्चा और मेड सुरक्षित हैं। करीब 15 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहने की घटना के बाद परिवार और सोसाइटी के लोगों ने लिफ्ट की सुरक्षा और नियमित मेंटेनेंस को लेकर जांच की मांग की है।

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