फर्जी NOC केस में हरियाणवी इन्फ्लुएंसर जेल भेजा, अनअप्रूव्ड जमीन के लिए ₹60 हजार देने का आरोप

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Fake NOC Case

हरियाणा में अनअप्रूव्ड जमीन की कथित फर्जी NOC से जुड़े मामले में एक हरियाणवी इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आरोप है कि जमीन की NOC हासिल करने के लिए करीब ₹60 हजार दिए गए थे। नगर परिषद की शिकायत के आधार पर मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।

मामला ऐसी जमीन की NOC से जुड़ा बताया जा रहा है, जो अप्रूव्ड नहीं थी। संबंधित दस्तावेज की जांच के दौरान कथित अनियमितता सामने आने के बाद नगर परिषद की ओर से शिकायत दी गई।

आरोप है कि अनअप्रूव्ड जमीन के लिए NOC हासिल करने की कोशिश की गई और इसके बदले करीब 60 हजार रुपए का भुगतान किया गया।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी NOC किस स्तर पर और किस तरीके से तैयार की गई थी।

इस मामले में हरियाणवी इन्फ्लुएंसर की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

नगर परिषद की शिकायत इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण आधार बनी है। परिषद की ओर से दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाए जाने के बाद जांच आगे बढ़ी।

पुलिस संबंधित NOC की मूल प्रति और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान कर सकती है। इससे यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेज आधिकारिक प्रक्रिया से जारी हुआ था या उसमें किसी स्तर पर छेड़छाड़ की गई।

जांच का एक अहम पहलू ₹60 हजार के कथित लेनदेन से जुड़ा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि यह रकम किसे और किस माध्यम से दी गई थी।

यदि भुगतान बैंक ट्रांसफर या किसी डिजिटल माध्यम से हुआ है तो उसका रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है। नकद लेनदेन होने की स्थिति में संबंधित लोगों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भूमिका अहम होगी।

पुलिस इस बात की भी जांच कर सकती है कि कथित NOC तैयार कराने में किसी बिचौलिए की भूमिका थी या नहीं।

यदि कोई बिचौलिया शामिल पाया जाता है तो उससे यह पता लगाया जा सकता है कि दस्तावेज तैयार करने के लिए उसका संपर्क किस व्यक्ति या कार्यालय से था।

नगर परिषद के संबंधित रिकॉर्ड की जांच से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि उस जमीन के लिए कभी आधिकारिक तौर पर NOC का आवेदन किया गया था या नहीं।

दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर, मुहर और अन्य विवरणों की सत्यता भी जांची जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है।

पुलिस यह भी पता लगा सकती है कि इसी तरीके से अन्य अनअप्रूव्ड जमीनों के लिए भी NOC जारी या तैयार की गई हैं या नहीं। ऐसा कोई रिकॉर्ड मिलने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।

नगर निकाय से संबंधित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल जमीन की खरीद-बिक्री या अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया में किया जाए तो इससे खरीदारों और सरकारी राजस्व दोनों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

इसलिए किसी भी जमीन की खरीद से पहले उसके अप्रूवल, NOC और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की संबंधित सरकारी कार्यालय से पुष्टि करना महत्वपूर्ण होता है।

मामले में गिरफ्तार व्यक्ति पर लगे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।

फिलहाल नगर परिषद की शिकायत पर हुई कार्रवाई के बाद हरियाणवी इन्फ्लुएंसर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ₹60 हजार के कथित भुगतान, फर्जी NOC तैयार करने की प्रक्रिया और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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