कैथल के बाबा राजपुरी डेरे में साधु की हत्या के बाद मुख्य महंत को लेकर ग्रामीणों के कई गंभीर दावे सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महंत की जीवनशैली और गतिविधियों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे थे, लेकिन धार्मिक पद और भगवा वस्त्रों के सम्मान के कारण लोग खुलकर विरोध नहीं करते थे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार महंत को कई बार लग्जरी गाड़ी में युवतियों के साथ घूमते देखा गया था। कुछ लोगों ने नशीले पदार्थ के सेवन से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। हालांकि ये सभी ग्रामीणों के दावे हैं। इनके समर्थन में पुलिस या किसी अन्य आधिकारिक एजेंसी की पुष्टि सामने आना जरूरी है।
बाबा राजपुरी डेरे में साधु की मौत के बाद मामला चर्चा में आया था। साधु की मौत को लेकर मुख्य महंत पर मारपीट और हत्या के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू की थी।
पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि साधु की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इससे पहले डेरे में क्या घटनाक्रम हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और वहां मौजूद लोगों के बयान जांच में अहम होंगे।
घटना के बाद ग्रामीणों ने महंत के व्यवहार और जीवनशैली को लेकर कई बातें सार्वजनिक रूप से कही हैं। उनका कहना है कि पहले भी उसकी गतिविधियों पर संदेह होता था, लेकिन धार्मिक संस्था से जुड़े होने के कारण लोग सीधे तौर पर सवाल उठाने से बचते थे।
इस बीच डेरे की संपत्ति और यहां रखे गए पशुओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि डेरे में बड़ी संख्या में पशु हैं और उनकी कीमत करीब ₹2 करोड़ होने का दावा किया जा रहा है। पशुओं की वास्तविक संख्या, नस्ल और बाजार मूल्य की आधिकारिक पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड या मूल्यांकन से ही हो सकेगी।
किसी धार्मिक डेरे की संपत्ति या महंगे पशुओं का होना अपने आप में किसी अपराध का संकेत नहीं है। पुलिस जांच का मुख्य विषय साधु की मौत और उससे जुड़े आरोप हैं। अन्य दावों को तभी मामले से जोड़ा जा सकता है, जब उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य सामने आएं।
इसी तरह किसी व्यक्ति का महिलाओं के साथ दिखाई देना अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि साबित नहीं करता। यदि ग्रामीण किसी विशेष अपराध या शोषण का आरोप लगा रहे हैं तो उसकी जांच अलग साक्ष्यों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर करनी होगी। किसी महिला की पहचान उजागर करना भी उचित नहीं होगा।
नशीले पदार्थ के सेवन से संबंधित आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। केवल ग्रामीणों के बयान के आधार पर इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
पुलिस साधु की मौत के मामले में संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। डेरे में लगे CCTV कैमरे, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्य भी घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकते हैं।
फिलहाल साधु की मौत के बाद महंत पर लगाए जा रहे नए आरोपों ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। लेकिन हत्या से लेकर उसकी निजी गतिविधियों और डेरे की संपत्ति तक सामने आ रहे प्रत्येक दावे की सत्यता पुलिस जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही तय होगी।
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