सिरसा के जवान सुखचैन सिंह को अंतिम विदाई, 5 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि; परिवार ने उठाई ₹1 करोड़ सहायता और सरकारी नौकरी की मांग

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Sukhchain Singh

सिरसा : जम्मू-कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सेना के जवान सुखचैन सिंह का शनिवार को उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ में अंतिम संस्कार किया गया। पांच साल के बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। जवान की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘सुखचैन फौजी अमर रहे’ के नारों से गांव गूंज उठा।

शनिवार सुबह करीब 10 बजे सेना की टुकड़ी सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर लेकर गांव कुत्ताबढ़ पहुंची। अंतिम दर्शनों के दौरान परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। पत्नी निर्मल कौर और परिवार की अन्य महिलाओं ने नम आंखों से सुखचैन को अंतिम विदाई दी।

पिता को खोने वाला पांच साल का बेटा माहौल से अनजान दिखाई दिया। परिवार के मुताबिक उसे अभी पूरी तरह समझ नहीं है कि उसके पिता अब वापस नहीं आएंगे। अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों और युवाओं ने तिरंगा लेकर जवान को श्रद्धांजलि दी।

अंतिम संस्कार से पहले करीब आधे घंटे तक अंतिम यात्रा रुकी रही। परिवार ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि घटना के बाद कई दिनों तक कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी उनका हाल जानने नहीं पहुंचा। परिवार ने सरकार से एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई।

परिजनों का कहना था कि उन्हें मांगों के संबंध में जिम्मेदार अधिकारी से लिखित आश्वासन चाहिए। इस दौरान पुलिस और सेना के अधिकारियों ने परिवार से बातचीत की। ग्रामीणों ने भी परिजनों को समझाया और भरोसा दिलाया कि पूरा गांव उनके साथ खड़ा है तथा उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

ग्रामीणों के समझाने के बाद परिवार अंतिम यात्रा आगे बढ़ाने के लिए तैयार हुआ। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनकी वर्तमान तैनाती 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट के साथ जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में थी। परिवार और गांव के लोगों के अनुसार गुरुवार को ड्यूटी के दौरान उनकी जान चली गई थी।

सुखचैन सिंह की शादी वर्ष 2020 में निर्मल कौर से हुई थी। उनके परिवार में पत्नी और पांच साल का बेटा है। सुखचैन जब करीब सात साल के थे, तभी उनके पिता बलविंद्र सिंह का निधन हो गया था। उनकी मां अमर कौर हैं।

परिवार में सुखचैन के दो भाई और एक बहन भी हैं। सभी भाई-बहन शादीशुदा हैं। उनके बड़े भाई गांव में शटरिंग का काम करते हैं और परिवार लंबे समय से कुत्ताबढ़ में रह रहा है।

सुखचैन सिंह के निधन के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। अंतिम यात्रा के दौरान युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकालकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। ग्रामीणों ने परिवार के साथ खड़े रहने और आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी से जुड़ी मांग को सरकार के समक्ष उठाने की बात कही है।

परिवार की ओर से एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग की गई है। इन मांगों पर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय या औपचारिक घोषणा होने की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

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