हथिनीकुंड बैराज के पास यमुना में हुए सेना के बोट हादसे में जान गंवाने वाले दोनों कमांडो की पारिवारिक कहानी सामने आने के बाद हर किसी की आंखें नम हैं। कमांडो अजय चार बहनों के इकलौते भाई थे। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उनके पिता ने मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया और सेना में जाने के सपने को पूरा करने में मदद की। वहीं महाराष्ट्र के कमांडो रोहित अपने पीछे पत्नी और करीब दो साल का बेटा छोड़ गए हैं।
अजय का परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आता है। परिवार के मुताबिक उनके पिता ने मेहनत-मजदूरी करके बच्चों का पालन-पोषण किया। चार बेटियों के बीच इकलौते बेटे अजय की पढ़ाई को लेकर भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। परिवार की तमाम मुश्किलों के बीच अजय ने आगे बढ़ने का लक्ष्य बनाए रखा।
मेहनत के दम पर अजय सेना तक पहुंचे और बाद में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कमांडो बने। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ पूरे गांव को गर्व था। चार बहनों के इकलौते भाई होने के कारण परिवार की उनसे भावनात्मक उम्मीदें भी काफी जुड़ी थीं।
दूसरे जवान रोहित महाराष्ट्र के रहने वाले थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा करीब दो साल का छोटा बेटा है। रोहित की मौत की खबर परिवार तक पहुंचने के बाद मातम छा गया। इतनी कम उम्र में बच्चे के सिर से पिता का साया उठने की खबर ने लोगों को भावुक कर दिया।
दोनों जवान हथिनीकुंड बैराज के पास यमुना में सेना की प्रशिक्षण गतिविधि का हिस्सा थे। इसी दौरान बोट हादसे का शिकार हो गई। बोट में सवार तीन जवानों को बचा लिया गया था, जबकि अजय और रोहित पानी के तेज बहाव में लापता हो गए।
हादसे के तुरंत बाद दोनों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। सेना और अन्य बचाव टीमों ने हथिनीकुंड से आगे यमुना तथा उससे जुड़े जलमार्गों तक तलाश का दायरा बढ़ाया।
कई दिनों की तलाश के बाद दोनों जवानों के शव अलग-अलग क्षेत्रों से बरामद हुए। एक जवान का शव हरियाणा में हादसे वाली जगह से करीब 200 किलोमीटर दूर मिला, जबकि दूसरे जवान का शव उत्तर प्रदेश क्षेत्र में बरामद किया गया।
दोनों के पार्थिव शरीर आवश्यक औपचारिकताओं के बाद एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ भेजे गए। वहां से आगे उनके पैतृक क्षेत्रों में भेजने और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की प्रक्रिया की गई।
हादसे ने अजय के पिता के वर्षों के संघर्ष को भी चर्चा में ला दिया है। मजदूरी करके बेटे को पढ़ाने वाले पिता के लिए उसका सेना में कमांडो बनना गर्व की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था। अब उसी बेटे को खोने से परिवार गहरे सदमे में है।
अजय की चारों बहनों के लिए भी यह अपूरणीय क्षति है। जिस इकलौते भाई के साथ परिवार की अनेक यादें और उम्मीदें जुड़ी थीं, उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
महाराष्ट्र में रोहित के परिवार की स्थिति भी बेहद भावुक है। पत्नी के सामने परिवार की जिम्मेदारी के साथ छोटे बेटे की परवरिश की चुनौती है। करीब दो साल का बेटा अभी इतना छोटा है कि अपने पिता को खोने की गंभीरता को भी नहीं समझ सकता।
हथिनीकुंड हादसे में दोनों जवानों की मौत ने दो परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। एक तरफ मजदूर पिता का इकलौता बेटा और चार बहनों का भाई चला गया, तो दूसरी तरफ एक छोटे बच्चे ने अपने पिता को खो दिया। दोनों जवानों की सेवा और उनके परिवारों का संघर्ष अब उनकी यादों का हिस्सा रहेगा।
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