सिरसा में मेडिकल रिसर्च के लिए NC कॉलेज को सौंपा पार्थिव शरीर, बेटी-बेटे ने साथ दिया कंधा; परिवार ने पेश की मिसाल

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Body Donation Sirsa

सिरसा में एक परिवार ने महिला के निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर मेडिकल शिक्षा और रिसर्च के लिए NC मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया। परिवार के इस निर्णय को चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है। अंतिम विदाई के दौरान बेटी और बेटे ने मिलकर अपनी मां को कंधा दिया।

महिला के निधन के बाद परिवार ने पारंपरिक अंतिम संस्कार के बजाय देहदान से जुड़े उनके संकल्प और मेडिकल शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपने का फैसला किया। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया और औपचारिकताएं पूरी की गईं।

अंतिम यात्रा के दौरान परिवार के सदस्य और परिचित मौजूद रहे। बेटी और बेटे ने एक साथ पार्थिव शरीर को कंधा दिया। परिवार ने इस अवसर को बेहद सादगी और सम्मान के साथ पूरा किया।

इसके बाद पार्थिव शरीर NC मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया, जहां इसका उपयोग नियमानुसार मेडिकल शिक्षा और शोध के लिए किया जा सकेगा। मेडिकल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में स्वेच्छा से किए गए देहदान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

मानव शरीर की संरचना को समझने के लिए मेडिकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक अध्ययन की आवश्यकता होती है। देहदान के माध्यम से मिलने वाले पार्थिव शरीर एनाटॉमी की शिक्षा, प्रशिक्षण और संबंधित चिकित्सा अध्ययन में उपयोगी होते हैं।

परिवार का यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मृत्यु के बाद शरीर को चिकित्सा शिक्षा के लिए दान करने को लेकर समाज में अभी भी जागरूकता सीमित है। ऐसे निर्णय लोगों को देहदान के उद्देश्य और मेडिकल शिक्षा में उसके योगदान को समझने का अवसर देते हैं।

बेटी और बेटे द्वारा मिलकर मां को कंधा देना भी सामाजिक दृष्टि से संदेश देने वाला रहा। अंतिम संस्कार और अंतिम विदाई से जुड़ी कई पुरानी परंपराओं में समय के साथ बदलाव देखने को मिल रहा है और परिवार अपनी इच्छा तथा परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले रहे हैं।

देहदान एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है और इसके लिए संबंधित मेडिकल संस्थान तथा लागू नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज और सहमति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। पार्थिव शरीर स्वीकार करने के बाद मेडिकल संस्थान निर्धारित नियमों के तहत उसका उपयोग करता है।

परिवार ने दुख की इस घड़ी में मेडिकल शिक्षा और रिसर्च के लिए योगदान देने का निर्णय लेकर मानव शरीर के अध्ययन में मदद का रास्ता चुना। इस कदम से भविष्य के डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।

महिला के निधन से परिवार में शोक है, लेकिन उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित करने के फैसले ने अंतिम विदाई को एक सामाजिक उद्देश्य से भी जोड़ दिया।

सिरसा में सामने आया यह मामला देहदान के प्रति जागरूकता का संदेश देता है। परिवार ने बेटी और बेटे की समान भागीदारी के साथ महिला को अंतिम विदाई दी और पार्थिव शरीर NC मेडिकल कॉलेज को सौंपकर चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए योगदान दिया।

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