सिरसा : जिले के कुत्ताबढ़ गांव निवासी सेना के जवान सुखचैन सिंह के निधन के बाद परिवार और ग्रामीणों की ओर से हरियाणा सरकार से आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग की जा रही है। परिवार का कहना है कि सुखचैन ही घर की जिम्मेदारियों का प्रमुख सहारा थे। उनकी मौत के बाद परिवार के भविष्य और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सुखचैन सिंह के ममेरे भाई जसपाल सिंह ने बताया कि करीब पांच महीने पहले सुखचैन छुट्टी पर घर आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने छोटे भाई सरबजीत सिंह और छोटी बहन हरजिंदर कौर की शादी में हिस्सा लिया था। परिवार के साथ बिताए उन दिनों की तस्वीरें और वीडियो अब परिजनों के लिए यादें बनकर रह गई हैं। छुट्टी पूरी होने के बाद सुखचैन वापस राजौरी में अपनी ड्यूटी पर चले गए थे।
परिवार के मुताबिक सुखचैन कुछ समय बाद दोबारा छुट्टी पर घर आने वाले थे। उनके बेटे का जन्मदिन आने वाला था और ममेरे भाई भूपेंद्र सिंह की शादी भी नवंबर में प्रस्तावित है। परिवार को उम्मीद थी कि वह इन पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे, लेकिन उससे पहले ही उनके निधन की खबर आ गई।
परिजनों का कहना है कि सुखचैन की मां बेटे की मौत से गहरे सदमे में हैं, जबकि पत्नी निर्मल कौर छोटे बेटे आकाशदीप को संभाल रही हैं। परिवार के अनुसार बच्चा अभी इतना छोटा है कि उसे पिता की मौत का अर्थ भी पूरी तरह समझ नहीं आया है।
सुखचैन के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। परिवार और ग्रामीणों ने उसी समय हरियाणा सरकार से ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता और सुखचैन के छोटे भाई को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी थी।
परिवार का कहना है कि उन्हें केंद्र और सेना की ओर से मिलने वाले नियमों के तहत सहायता के बारे में आश्वासन दिया गया है, लेकिन वे हरियाणा सरकार से भी अतिरिक्त आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। इन मांगों पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी नियमों और आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
परिजनों के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। उनके पास अपनी कृषि भूमि नहीं है। सुखचैन जब करीब सात साल के थे, तभी उनके पिता बलविंद्र सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने बच्चों की परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाली।
परिवार के मुताबिक सुखचैन करीब 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए और इसके बाद उन्होंने घर की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कीं। उनके निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो गया है।
ग्रामीण बताते हैं कि सुखचैन सिंह को फुटबॉल खेलने का काफी शौक था और वह अच्छे खिलाड़ी थे। गांव के युवाओं और बच्चों के बीच भी उनकी पहचान थी। ग्रामीणों ने प्रशासन को मांग पत्र देकर गांव का नाम सुखचैन सिंह के नाम पर रखने सहित कई मांगें रखी हैं।
कुत्ताबढ़ गांव में बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों की पुरानी नाराजगी है। घग्घर नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले चुनाव बहिष्कार तक का फैसला लिया था। इसके बाद आश्वासन मिलने पर पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ और ग्रामीण मतदान के लिए तैयार हुए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल और उससे जुड़े सड़क निर्माण का काम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अधूरे रास्ते और सड़क पर पड़ी निर्माण सामग्री के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है और हादसे का खतरा बना रहता है।
अब सुखचैन सिंह के निधन के बाद गांव के लोगों ने परिवार को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और जवान की स्मृति से जुड़ी मांगों को प्रशासन के सामने रखा है। परिवार और ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार इन मांगों पर जल्द निर्णय ले।
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