सोनीपत : दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल की छात्राओं ने एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का दावा है कि प्रोफेसर के व्यवहार से करीब 38 छात्राएं प्रभावित हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार शिकायत देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 11 सितंबर से प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है।
छात्राओं के मुताबिक संबंधित प्रोफेसर कथित तौर पर क्लास में छात्राओं को असहज करने वाली टिप्पणियां करता है और उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश करता है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि पढ़ाई के दौरान व्यक्तिगत और अनुचित सवाल पूछे जाते हैं, जिससे कक्षा का माहौल असहज हो जाता है।
एक छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर छात्राओं के कपड़ों और शारीरिक बनावट को लेकर अनुचित टिप्पणियां करता है। दूसरी छात्रा ने दावा किया कि उससे व्यक्तिगत संबंधों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक सवाल पूछे गए। छात्राओं का कहना है कि इस तरह की कथित टिप्पणियों के कारण वे क्लास में असुरक्षित और असहज महसूस करती हैं।
एक छात्रा ने आरोप लगाया कि एक बार वह क्लास में अकेली थी तो प्रोफेसर ने उससे ऐसी बातें कहीं, जिनसे वह डर गई। उसने घटना की जानकारी बाद में अपनी सहेली को दी। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोफेसर किसी न किसी बहाने शारीरिक संपर्क करने की कोशिश करता है। ये सभी आरोप फिलहाल जांच और पुष्टि के अधीन हैं।
छात्राओं का कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि संबंधित प्रोफेसर के क्लास में आने पर कई छात्राएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। उनका दावा है कि कैंपस में प्रोफेसर दिखाई देने पर कुछ छात्राएं रास्ता तक बदल लेती हैं।
छात्राओं के अनुसार उन्होंने 19, 20 और 21 अगस्त को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष शिकायतें रखी थीं। उनका आरोप है कि शुरुआत में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। विरोध प्रदर्शन की बात कहने के बाद एक आंतरिक जांच कमेटी गठित की गई, लेकिन बाद में उस कमेटी को भी हटा दिए जाने का दावा किया गया है।
एक छात्रा ने दावा किया कि 30 से अधिक छात्राओं से बातचीत में इसी तरह के व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। छात्राओं की ओर से प्रभावित संख्या करीब 38 बताई जा रही है। हालांकि इस संख्या और प्रत्येक शिकायत की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
छात्राओं ने प्रोफेसर पर परीक्षा में नकल से संबंधित गलत आरोप लगाने का भी दावा किया है। उनका कहना है कि इस संबंध में रजिस्ट्रार और अन्य संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई गई है।
प्रदर्शन कर रही छात्राओं की प्रमुख मांग है कि आरोपों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की जाए तथा जांच के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कुछ छात्राओं ने संबंधित प्रोफेसर को विश्वविद्यालय से हटाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि जूनियर और सीनियर छात्राओं की सुरक्षा और गरिमा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
छात्राओं के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्रवाई के लिए 9 सितंबर तक का समय दिया गया था। निर्धारित समय तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने 11 सितंबर से दोबारा प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा सरकार से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
छात्राओं का कहना है कि पुलिस को भी शिकायत दी गई है। फिलहाल वे विश्वविद्यालय स्तर पर मामले की गंभीर जांच और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाने की मांग कर रही हैं।
वहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति और आरोपों का सामना कर रहे प्रोफेसर की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों पर उनका पक्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
मामले में छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। अब विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
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