गुरुग्राम : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई से जुड़े कथित प्लॉट धोखाधड़ी मामले में गुरुग्राम की अदालत ने SIT की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। रोशनी बिश्नोई पर मृत व्यक्ति के नाम से कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति ट्रांसफर कराने से जुड़े मामले में आरोप हैं। अदालत ने SIT को 29 सितंबर तक केस डायरी और संबंधित रिकॉर्ड के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में रोशनी बिश्नोई की अग्रिम जमानत याचिका पहले खारिज हो चुकी है। उनके खिलाफ उद्घोषणा की कार्रवाई भी की जा चुकी है। इसके बावजूद 14 सितंबर को SIT के सामने पूछताछ के लिए उपलब्ध होने के बाद उन्हें गिरफ्तार नहीं किए जाने और बाद में छोड़ दिए जाने के मुद्दे पर अदालत ने जांच एजेंसी से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी कानून के अनुसार अपनी जांच और निष्कर्ष के लिए स्वतंत्र है। हालांकि यदि एक ही घटना और समान परिस्थितियों से जुड़े आरोपियों के साथ अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं तो उसके पीछे ठोस और रिकॉर्ड पर आधारित कारण होने चाहिए।
अदालत ने इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा कि इसी FIR से जुड़े अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर हिरासत में रखा गया, जबकि रोशनी बिश्नोई को जांच में शामिल करने के बाद गिरफ्तार नहीं किया गया।
मामले में करीब ₹2.38 करोड़ के कथित बैंक ट्रांजेक्शन का मुद्दा भी सामने आया है। जांच एजेंसी के रिकॉर्ड के अनुसार मृतक सुनील कुमार के नाम से कथित तौर पर खोले गए बैंक खाते से ₹2.38 करोड़ से अधिक की राशि रोशनी बिश्नोई के खाते में ट्रांसफर होने का आरोप है।
अभियोजन पक्ष इससे पहले इस ट्रांजेक्शन को मामले में रोशनी की कथित भूमिका से जोड़कर पेश कर चुका है। हालांकि इस राशि के हस्तांतरण का वास्तविक उद्देश्य क्या था और इसका कथित फर्जीवाड़े से क्या संबंध है, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
अदालत ने ई-मेल पत्राचार, सह-आरोपियों के बयानों और अन्य दस्तावेजों से संबंधित जांच की स्थिति पर भी सवाल किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि जब कुछ दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य तकनीकी जांच अभी लंबित है तो SIT किस आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंची कि गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब जांच एजेंसी को रोशनी बिश्नोई से संबंधित लंबित न्यायिक प्रक्रिया और निर्धारित पेशी की जानकारी थी, तब पूछताछ के लिए उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें अदालत के सामने पेश क्यों नहीं किया गया।
रोशनी बिश्नोई की ओर से उनके वकील ने उद्घोषणा की कार्रवाई रद्द करने के लिए आवेदन भी दाखिल किया है। अदालत ने इस आवेदन पर फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं दिया है। मामले में रोशनी की व्यक्तिगत उपस्थिति नहीं होने के कारण आगे की सुनवाई के साथ इस आवेदन पर विचार किया जाएगा।
अदालत ने SIT को 29 सितंबर तक उसके द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर विस्तृत और बिंदुवार जवाब देने को कहा है। संबंधित जांच अधिकारी को केस डायरी और अन्य रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह मामला गुरुग्राम के सेक्टर-14 थाने में दर्ज एक FIR से जुड़ा है। शिकायतकर्ता धर्मवीर बिश्नोई ने रोशनी बिश्नोई और उनके पति अनूप बिश्नोई समेत अन्य लोगों पर मृत व्यक्तियों के नाम से कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और संपत्ति के लेनदेन में उनका इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे।
शिकायत में आरोप है कि गुरुग्राम के सेक्टर-23 और 23A स्थित संपत्तियों के लेनदेन में कथित फर्जी पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक संबंधित प्लॉट उसके पिता सुनील और चाचा संदीप कुमार के नाम थे। आरोप है कि संदीप कुमार की मृत्यु के कई वर्ष बाद भी उनके नाम का इस्तेमाल संपत्ति संबंधी दस्तावेज तैयार करने और ट्रांसफर की प्रक्रिया में किया गया।
शिकायत में यह भी आरोप है कि मृत व्यक्ति की जगह किसी अन्य व्यक्ति को पेश कर पजेशन सर्टिफिकेट और NOC हासिल किए गए। इसके बाद कथित फर्जी हलफनामों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति की कन्वेंस डीड कराने और आगे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
मामले में पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर अलग-अलग तस्वीरें होने तथा हस्ताक्षरों की सत्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन सभी आरोपों की जांच SIT कर रही है।
रोशनी बिश्नोई की अग्रिम जमानत याचिका अगस्त में गुरुग्राम की अदालत से खारिज हो चुकी है। उस समय अभियोजन पक्ष ने कथित बैंक ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों से संबंधित सामग्री को जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया था।
फिलहाल रोशनी बिश्नोई के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। अदालत ने भी स्पष्ट किया है कि SIT के रुख और उसके स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। अब 29 सितंबर की सुनवाई में जांच एजेंसी के जवाब और केस रिकॉर्ड के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
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