पानीपत : आरोपियों की जमानत के लिए दूसरे लोगों की पहचान और दस्तावेज इस्तेमाल किए जाने के दो मामले सामने आए हैं। पानीपत की दो अलग-अलग अदालतों ने फर्जी जमानती बनकर पेश हुए लोगों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश पर सिटी थाना पुलिस ने दो मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहला मामला रेप केस के आरोपी राहुल की जमानत से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबरदीप सिंह की अदालत में राहुल के गैरहाजिर रहने पर उसकी जमानत रद्द कर दी गई थी। इसके बाद उसके जमानतियों को नोटिस भेजे गए। नोटिस मिलने पर गांव डाहर निवासी राम किशन अदालत पहुंचे और लिखित रूप में बताया कि उन्होंने राहुल की जमानत नहीं ली थी।
राम किशन का कहना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके संपत्ति संबंधी कागजात और आधार कार्ड में हेरफेर कर उनका इस्तेमाल किया। मामले में जमानती की पहचान करने वाले रोहताश की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अदालत ने फर्जी जमानती बनकर पेश हुए व्यक्ति और रोहताश के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। राहुल के खिलाफ भी अदालत ने उद्घोषणा जारी की है।
दूसरा मामला भगोड़ा घोषित आरोपी सौरभ की जमानत का है। करनाल निवासी शुभम ने अदालत को बताया कि 29 अगस्त 2022 को किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए आधार कार्ड और वाहन की आरसी लगाकर सौरभ की जमानत दी थी। अदालत ने प्रस्तुत आधार कार्ड की जांच के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से रिपोर्ट मांगी।
अदालत को 12 मार्च 2026 को मिली रिपोर्ट के अनुसार, जमानत में लगाया गया आधार कार्ड फर्जी और अमान्य था। इस आधार पर वास्तविक शुभम को मामले में जिम्मेदार नहीं माना गया। जमानती की पहचान करने वाले राज कुमार की मृत्यु होने की जानकारी भी अदालत को दी गई।
अदालत ने सौरभ की मुजफ्फरनगर जिले में स्थित संपत्ति की कुर्की के लिए वारंट जारी किया है। पुलिस अब दोनों जमानत मामलों में दस्तावेज पेश करने वाले व्यक्तियों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
![]()











