सोनीपत। मंडौरा गांव में विवादित संपत्ति पर बने मकानों को गिराने और ग्रामीणों को बेदखल करने की कार्रवाई पर खरखौदा की अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन सुषमा की अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। दिनेश व अन्य ग्रामीणों की याचिका पर अदालत ने ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर 2026 को होगी।
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत मंडौरा, नायब तहसीलदार, हलका पटवारी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि प्रतिवादियों ने गलत और अवैध तरीके से नोटिस जारी किए हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इन नोटिस के आधार पर उनके मकान गिराए जा सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि मकान गिरने से उनके आशियाने उजड़ जाएंगे और उन्हें ऐसा नुकसान होगा, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। इसी आधार पर उन्होंने तत्काल सुनवाई और कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
मामले में तत्काल राहत की मांग को देखते हुए अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80(2) के तहत पूर्व नोटिस की अनिवार्यता से छूट देकर सुनवाई की। दस्ती समन जारी कर प्रतिवादियों को 13 अक्टूबर को दोपहर बाद अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।
निर्धारित समय पर ग्राम पंचायत के सरपंच अनिल कुमार व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। अन्य संबंधित प्रतिवादियों की ओर से सरकारी वकील राकेश कुमार, क्लर्क और हलका पटवारी उपस्थित हुए। प्रतिवादी पक्ष ने मुकदमे और स्टे अर्जी पर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी किए बिना ग्रामीणों को अंतरिम राहत दी। आदेश के अनुसार, अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं को विवादित संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकेगा और उनके मकान या निर्माण नहीं गिराए जा सकेंगे। प्रतिवादियों को लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। यह अंतरिम आदेश है; संपत्ति के अधिकार और नोटिस की वैधता पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
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