झज्जर की अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक के ऋण वसूली मामले में गांव रैया निवासी सुशीला के खिलाफ फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सिविल जज रवि की अदालत ने 1 लाख 44 हजार 873 रुपये 57 पैसे की वसूली का आदेश दिया। महिला को मुकदमा दायर होने की तारीख से रकम की वसूली तक छह प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज और मुकदमे का खर्च भी देना होगा।
बैंक के अनुसार, सुशीला ने 6 अप्रैल 2022 को पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। जरूरी समझौते पूरे होने के बाद 9 मई 2022 को ऋण जारी किया गया।
तय शर्तों के मुताबिक, कर्ज ब्याज सहित 60 मासिक किस्तों में चुकाना था। प्रत्येक किस्त 2,600 रुपये निर्धारित थी। बैंक का कहना था कि महिला ने किस्तें जमा करना बंद कर दिया। बार-बार संपर्क करने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद बैंक ने 22 अगस्त 2024 को अदालत में वसूली का मुकदमा दायर किया।
सुनवाई के दौरान महिला अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। अदालत ने 10 सितंबर 2024 को उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। बैंक की ओर से वरिष्ठ प्रबंधक अमित कुमार ने गवाही दी और ऋण के दस्तावेज, समझौते, कानूनी नोटिस तथा खाते का विवरण पेश किया।
बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार, 16 अगस्त 2024 तक ब्याज सहित बकाया राशि 1 लाख 44 हजार 873 रुपये 57 पैसे थी। महिला की ओर से बैंक के दावे का विरोध या ऋण चुकाने का प्रमाण पेश नहीं किया गया।
दस्तावेजों और गवाही के आधार पर अदालत ने बैंक के पक्ष में वसूली डिक्री जारी की। आदेश में बकाया राशि, निर्धारित साधारण ब्याज और मुकदमे का खर्च अदा करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
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