महेंद्रगढ़ साइबर क्राइम टीम ने सीएससी संचालकों के खातों में कथित साइबर ठगी की रकम भेजकर नकदी लेने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान राजस्थान के झुंझुनू जिले के गणेशपुरा निवासी विनय यादव और गितेश के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, बेवल और भोजावास के तीन केंद्र संचालकों ने कुल 3 लाख 97 हजार 650 रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दी थी। आरोप है कि खातों में रकम ट्रांसफर करने के बाद नकदी ली गई। बाद में बैंक खाते फ्रीज होने पर संचालकों को संबंधित लेनदेन के साइबर ठगी से जुड़े होने की जानकारी मिली।
शिकायतकर्ता संजय कुमार ने बताया कि 7 जुलाई को एक युवक उनके सेंटर पर आया और क्यूआर कोड के जरिए रकम भेजकर 50 हजार रुपये नकद लिए। उनके अनुसार, 7 और 8 जुलाई को कई लेनदेन के माध्यम से कुल 2 लाख 62 हजार 930 रुपये लिए गए। कृष्ण सिंह ने 31 हजार रुपये और बबली ने 1 लाख 3 हजार 720 रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत की।
जांच के दौरान पुलिस ने तीनों केंद्रों के बैंक खातों का रिकॉर्ड जुटाया। संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और ग्राहक विवरण की पड़ताल भी की गई। पुलिस के अनुसार, समन्वय पोर्टल पर इन खातों से जुड़ी नौ साइबर शिकायतें मिलीं।
बेवल स्थित सेंटर की सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विनय यादव को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ तथा आगे की जांच में गितेश की कथित संलिप्तता सामने आने पर उसे भी पकड़ा गया। मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है।
दोनों को 12 अक्टूबर को अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने गितेश की दो दिन की पुलिस हिरासत और विनय की 14 दिन की न्यायिक हिरासत का अनुरोध किया। उपलब्ध विवरण में अदालत के अंतिम आदेश की जानकारी नहीं दी गई है।
पुलिस ने सीएससी और मनी ट्रांसफर केंद्र संचालकों से अनजान व्यक्तियों को नकदी देने से पहले पहचान और लेनदेन के उद्देश्य का सत्यापन करने की अपील की है।
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