चंडीगढ़ में ₹2154 करोड़ से बनेगा एडवांस्ड मेडिकल सेंटर, सेक्टर-53 में 13.6 एकड़ जमीन पर प्रस्ताव, PGI का बोझ होगा कम

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चंडीगढ़। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का बढ़ता दबाव कम करने के लिए प्रशासन ने सेक्टर-53 में एडवांस्ड मेडिकल केयर इंटीग्रेटेड सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 2154 करोड़ रुपए की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दी गई है। चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को प्रस्ताव सौंपकर मंजूरी का अनुरोध किया है। प्रस्तावित मेडिकल सेंटर करीब 13.6 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसमें 10 एकड़ सरकारी जमीन और 3.6 एकड़ रेजिडेंशियल भूमि शामिल है। परियोजना के कुल बजट में 1704 करोड़ रुपए भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च करने का प्रस्ताव है, जबकि 450 करोड़ रुपए आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन की योजना इस सेंटर को उत्तर भारत के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित करने की है। प्रस्ताव के अनुसार, यहां दो बड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। पहला सेंटर महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए होगा, जिसमें गायनेकोलॉजी, प्रसूति चिकित्सा, नवजात शिशु देखभाल, बाल रोग और पीडियाट्रिक सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके लिए 600 बेड प्रस्तावित हैं। दूसरे सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, ट्रॉमा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए 500 बेड का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, परियोजना को समग्र रूप से 1000 बेड का सेंटर बताया गया है, जबकि दोनों इकाइयों के प्रस्तावित बेड जोड़ने पर संख्या 1100 होती है। अंतिम स्वीकृति में स्थिति स्पष्ट होगी। सेंटर में मेडिकल स्टाफ के आवास और मरीजों के परिजनों के लिए नाइट शेल्टर बनाने की भी योजना है। वर्तमान में पीजीआई में सालाना करीब 28 लाख ओपीडी मरीज पहुंचते हैं और लगभग 95 हजार सर्जरी होती हैं। सेक्टर-16 के जीएमएसएच में भी सालाना करीब 11 लाख ओपीडी मरीज आते हैं। नया सेंटर बनने से पीजीआई, जीएमसीएच और जीएमएसएच पर मरीजों का दबाव कम होने की उम्मीद है। फिलहाल परियोजना केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी पर निर्भर है।

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