हरियाणा के गुरुग्राम में सामने आए कथित कस्टोडियल टॉर्चर मामले में मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस द्वारा जो यह कहा गया कि वह फ्लाईओवर से गिरने के कारण घायल हुआ, वह सही नहीं है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसकी टांग पुलिस हिरासत के दौरान तोड़ी गई। ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं और इनकी जांच की जानी बाकी है।
मानवाधिकार आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस कार्रवाई और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी है। आयोग यह भी जानना चाहता है कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष क्या है।
दूसरी ओर, पुलिस की ओर से अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और जांच रिपोर्ट का भी परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या मानवाधिकारों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर ही मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल आयोग DGP की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
यह मामला अब राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतकर्ता के आरोपों और पुलिस के पक्ष में किस हद तक तथ्यात्मक आधार है।
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