हरियाणा में सरकारी फंड से जुड़े आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच अब करनाल जिले तक पहुंच गई है। बुधवार को सीबीआई की चार से पांच टीमों ने पुलिस बल के साथ घरौंडा अनाज मंडी में छापेमारी की। अधिकारियों ने कई आढ़त फर्मों के दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड की पड़ताल की। मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचकर भी संबंधित फर्मों की जानकारी जुटाई गई।
सीबीआई से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंडी की तीन से चार आढ़त फर्में जांच के दायरे में हैं। इनके लेनदेन में कथित फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका की जांच की जा रही है। टीमों ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों का मिलान किया। इन फर्मों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मार्केट कमेटी कार्यालय में अधिकारियों ने आढ़त फर्मों से संबंधित रिकॉर्ड देखा और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ली। मंडी में हुई कार्रवाई को लेकर आढ़तियों तथा अन्य कारोबारियों के बीच चर्चा रही।
इससे एक दिन पहले मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के पैसों में कथित धोखाधड़ी तथा मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में हुई।
ईडी के मुताबिक, सरकारी खातों से निकाली गई रकम ज्वेलर्स और उनसे जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों में भेजी गई। आरोप है कि रकम को सामान्य कारोबारी लेनदेन के रूप में दिखाकर उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की कोशिश की गई। एजेंसी ने बिचौलिए गौरव कंसल पर रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।
मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हरियाणा पुलिस की एफआईआर से हुई थी। विकास एवं पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी खातों के बैलेंस में गड़बड़ी सामने आई थी।
ईडी ने रकम का हिस्सा छह आईएएस अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों तक रिश्वत के रूप में पहुंचने का आरोप भी लगाया है। सीबीआई पंचकूला की विशेष अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।
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