हरियाणा: प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने सरकार के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया। कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा और कई जगह लोग विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर आए। लगातार बिगड़ते हालात के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार शाम को फरीदाबाद से अचानक पंचकूला पहुंचे और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।
सरकार के आश्वासन के बाद खत्म हुई हड़ताल
कर्मचारियों के साथ बैठक में सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) से संबंधित फैसले की समीक्षा कराने का आश्वासन दिया। इसके अलावा निजी कंपनी के लाइसेंस के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कही गई। सरकार की ओर से मिले इन आश्वासनों के बाद कर्मचारियों ने करीब 45 घंटे से जारी हड़ताल समाप्त कर दी।
बिजली संकट के पीछे रहे ये 5 अहम फैक्टर
1. कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित: हड़ताल का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला। बिजली बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
2. घरों में पानी की सप्लाई पर असर: बिजली नहीं होने के कारण पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। इससे लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में मुश्किलें बढ़ीं और विरोध तेज होने लगा।
3. औद्योगिक इकाइयों को नुकसान की आशंका: बिजली संकट के कारण उद्योगों के कामकाज पर असर पड़ा। लगातार बिजली आपूर्ति बाधित रहने से औद्योगिक गतिविधियों को जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो गया।
4. कर्मचारियों की मांगों पर सरकार को देना पड़ा आश्वासन: कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल जारी रखी। बढ़ते संकट के बीच सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा। HERC से फैसले की समीक्षा और निजी कंपनी के लाइसेंस के खिलाफ कानूनी लड़ाई का आश्वासन इस बैठक का प्रमुख नतीजा रहा।
5. बिजली खपत में 35 फीसदी तक गिरावट का दावा: बिजली मंत्री अनिल विज ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि हरियाणा में सामान्य तौर पर बिजली की खपत 10 से 12 हजार मेगावॉट तक रहती है। उनके अनुसार, हड़ताल के दौरान बिजली खपत में करीब 35 फीसदी तक कमी दर्ज की गई।
कर्मचारी यूनियन ने किया 60 से 70 फीसदी सप्लाई प्रभावित होने का दावा
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम कर्मचारी यूनियन के प्रधान पुनीत कुंडू ने दावा किया कि हड़ताल के दौरान प्रदेश में 60 से 70 फीसदी तक बिजली सप्लाई प्रभावित हुई। उनका कहना था कि कर्मचारियों की मांगें जायज थीं, इसलिए सरकार को बातचीत कर आश्वासन देना पड़ा।
कुल मिलाकर, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने प्रदेश में बिजली आपूर्ति, औद्योगिक गतिविधियों और आम लोगों की दैनिक जरूरतों पर गंभीर असर डाला। बढ़ते जनविरोध और बिजली संकट के बीच सरकार को कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर समाधान का रास्ता निकालना पड़ा। हालांकि, अब इस पूरे मामले में सरकार के आश्वासनों पर आगे होने वाली कार्रवाई अहम रहेगी।
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