हरियाणा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे ‘दूध बंद’ आंदोलन का शनिवार को तीसरा दिन है। सिरसा में सप्लाई रोकने को लेकर किसान-पशुपालकों और दूधियों के बीच विवाद सामने आए हैं। डेयरी संचालकों का आरोप है कि शुक्रवार को दूध के ड्रम और कैन छीन लिए गए, जिससे दूध घरों और प्लांट तक नहीं पहुंच सका। कई स्थानों पर हंगामे के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
किसानों ने शनिवार सुबह 11 बजे सिरसा वीटा प्लांट पर बैठक बुलाई है। प्लांट के गेट के बाहर धरने का आह्वान भी किया गया है। इसी बैठक में आंदोलन और आगे की हड़ताल को लेकर फैसला किया जाएगा।
कंगनपुर निवासी डेयरी संचालक प्रतीक बिश्नोई के मुताबिक, शुक्रवार को सड़क से गुजर रहे डेयरी संचालकों और दूधियों से ड्रम व कैन लेकर करीब एक हजार लीटर दूध इकट्ठा किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ दूध जरूरतमंद लोगों में बांटा गया और कुछ लोगों को मौके पर पिलाया गया।
बिश्नोई के अनुसार, बचा दूध कंगनपुर के गुरुघर और मंदिर के अलावा सिरसा के चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेजा गया। दूध ले जाने के लिए गुरुघर की गाड़ी भी बुलाई गई थी। बच्चे और युवा भी डिब्बे लेकर दूध लेने पहुंचे।
चिल्ला साहिब गुरुद्वारा के प्रबंधक बाबा जगतार सिंह ने कहा कि संगत की ओर से आने वाला दूध लंगर में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने किसानों और पशुपालकों का समर्थन करने की बात कही। कंगनपुर गुरुघर के प्रधान पुष्पेंदर सिंह ने बताया कि वहां लंगर नहीं लगता, इसलिए एकत्रित दूध चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेजा जाता है।
इस बीच वीटा के रानियां चिलिंग सेंटर के स्टाफ ने कुछ गांवों से सप्लाई कम होने की जानकारी दी है। करीब 15 हजार लीटर भंडारण क्षमता वाले सेंटर में अब रोजाना औसतन 4100 से 4200 लीटर दूध पहुंच रहा है।
किसान संगठनों ने प्लांट तक पहुंच रहे दूध के स्रोत पर सवाल उठाते हुए मिलावट की जांच की मांग की है। दूध नकली या मिलावटी होने का उनका आरोप अभी जांच से पुष्ट नहीं हुआ है।
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