हरियाणा : प्रदेश के पीएम श्री स्कूलों के शिक्षकों और अधिकारियों के लिए बेंगलुरु स्थित द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में पांच दिवसीय रेसिडेंशियल ‘मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस’ एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया जा रहा है। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 से 19 सितंबर 2026 तक चलेगा।
इस विशेष एक्सपोजर विजिट में प्रदेश के 12 जिलों से चयनित कुल 144 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 138 शिक्षक शामिल हैं और प्रत्येक चयनित पीएम श्री स्कूल से एक शिक्षक को कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को तनाव प्रबंधन, भावनात्मक कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित आधुनिक तकनीकों एवं व्यावहारिक तरीकों से परिचित कराना है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक इन अनुभवों का इस्तेमाल अपने स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए अधिक सकारात्मक, स्वस्थ और सहयोगी वातावरण तैयार करने में कर सकेंगे।
पांच दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सेशन, इंटरैक्टिव कैपेसिटी बिल्डिंग गतिविधियां, आश्रम टूर और सिटी टूर को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।
इस एक्सपोजर विजिट के लिए प्रतिभागियों को अलग-अलग बैच में नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया। पहले बैच में गुरुग्राम, करनाल, नूंह, झज्जर, हिसार और हांसी से चयनित प्रतिभागी शामिल रहे। अगले बैच में भिवानी, चरखी दादरी, अंबाला, जींद, कैथल और सिरसा के प्रतिभागियों को भेजा गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होने के बाद प्रतिभागियों की बेंगलुरु से वापसी 20 और 21 सितंबर को निर्धारित की गई है।
कार्यक्रम की खास बात यह है कि चयनित शिक्षकों की यात्रा और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्था विभाग की ओर से की गई है। संबंधित स्कूल से हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन तक आने-जाने में होने वाला पात्र यात्रा खर्च भी नियमानुसार विभागीय बजट से क्लेम किया जा सकेगा।
यात्रा को लेकर प्रतिभागियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। किसी शिक्षक के साथ परिवार के सदस्य अथवा किसी अनधिकृत व्यक्ति को ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है। सभी प्रतिभागियों के लिए वैध पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड, और विधिवत हस्ताक्षरित सेल्फ-कंसेंट फॉर्म रखना अनिवार्य किया गया है।
पूरे कार्यक्रम के बेहतर समन्वय के लिए एपीसी गुरुग्राम दिनेश गुलिया को ओवरऑल नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रतिभागियों की यात्रा, प्रशिक्षण और अन्य व्यवस्थाओं के समन्वय की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है।
इसके साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान एसआईआर ड्यूटी या किसी अन्य आधिकारिक कार्य में न लगाया जाए, ताकि वे निर्धारित कार्यक्रम में पूरी तरह भाग ले सकें।
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव और तकनीक शिक्षक अपने-अपने स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ साझा कर सकेंगे। इसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक वातावरण को भी बढ़ावा देना है।
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