विदेशी तनाव का प्रदेश पर असर, सड़क निर्माण के लिए सामग्री संकट, सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम किए

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Haryana roads

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का असर अब हरियाणा के बुनियादी ढांचे पर भी देखने को मिल रहा है। राज्य में सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए इस्तेमाल होने वाले तारकोल (बिटुमेन) की कमी सामने आई है, जिससे कई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस कमी के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बाधित होना और कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव है।

बताया जा रहा है कि भारत में उपयोग होने वाला काफी मात्रा में तारकोल आयात पर निर्भर करता है, और मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर हरियाणा जैसे राज्यों पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में सड़क निर्माण कार्य चल रहे हैं।

स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण कार्यों को प्रभावित न होने दिया जाए। इसके लिए आयातित तारकोल के उपयोग पर जोर दिया गया है, ताकि परियोजनाओं में देरी न हो। साथ ही, विभागों को यह भी कहा गया है कि वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करें और प्राथमिकता के आधार पर जरूरी सड़कों का निर्माण पूरा करें।

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश में जुटे हैं और जल्द ही स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, बढ़ती लागत और सीमित उपलब्धता के चलते परियोजनाओं के बजट पर भी दबाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की निर्भरता कम की जा सके।

फिलहाल, सरकार का ध्यान सड़क निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने और जनता को किसी तरह की असुविधा से बचाने पर केंद्रित है।

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