स्वर्ण पदक लेकर रिटौली पहुंचीं कीर्ति शर्मा, दादा के गले में मेडल डालकर जताया सम्मान

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Kirti Sharma,

एशियन गेम्स की तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली कीर्ति शर्मा का सोमवार दोपहर जींद जिले के पैतृक गांव रिटौली पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीण उन्हें जामनी मोड़ से खुली जीप में बैठाकर गांव तक ले गए। स्वागत के दौरान कीर्ति ने अपना स्वर्ण पदक दादा रामजुवारी शर्मा के गले में डाल दिया। दादा ने जीप में खड़े होकर पोती का पदक ग्रामीणों को दिखाया।

कीर्ति के स्वागत में सफीदों विधायक रामकुमार गौतम भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि कीर्ति ने गांव, जिले और प्रदेश के साथ देश का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसर देने की बात कही। ग्रामीणों ने कीर्ति की उपलब्धि पर खुशी जताई और उनके संघर्ष तथा मेहनत की सराहना की।

कीर्ति ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान उनका पूरा ध्यान देश के लिए पदक जीतने पर था। इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें करीब सात साल लगे। उन्होंने कहा कि मेहनत और लगन से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बेटियों को पूरा मौका देने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि अवसर मिलने पर वे देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

दादा रामजुवारी शर्मा ने बताया कि कीर्ति ने पदक उनके गले में डालते हुए इसे उनकी जीत कहा। उन्होंने इसे पोती का अपने प्रति सम्मान बताया। रामजुवारी ने कहा कि कीर्ति की उपलब्धि उसकी मेहनत का परिणाम है और उसने पूरे गांव को गौरवान्वित किया है।

कीर्ति ने तीरंदाजी की शुरुआत सीमित संसाधनों से की थी। पिता विजय शर्मा ने उनके लिए पांच हजार रुपए में पुराना धनुष खरीदा था। बाद में भारतीय खेल प्राधिकरण यानी साई में चयन होने पर पिता ने आढ़ती से 60 हजार रुपए कर्ज लेकर नया धनुष दिलाया।

पिल्लुखेड़ा के एक निजी स्कूल में पढ़ाई के दौरान कोच उद्यम सिंह ने उनकी प्रतिभा पहचानी थी। वर्ष 2019-20 में स्कूल में डीपीई के रूप में आए उद्यम सिंह ने पिता को कीर्ति को तीरंदाजी में आगे बढ़ाने की सलाह दी। परिवार के सहयोग और लगातार अभ्यास से कीर्ति राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचीं और कई पदक हासिल किए।

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