चंडीगढ़ में बैंक घोटाले के आरोपी विक्रम वधवा को मेडिकल चेकअप के बाद जेल की जगह होटल ले जाने के मामले में दाखिल चार्जशीट पर अदालत ने सवाल उठाए हैं। पुलिस ने दो पुलिसकर्मियों समेत पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, लेकिन इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 8 शामिल नहीं की गईं। अदालत ने इन धाराओं को हटाने का आधार स्पष्ट करने के लिए डीएसपी सेंट्रल एसपीएस सोंधी को सोमवार को तलब किया है।
इससे पहले शनिवार शाम डीएसपी अदालत में पेश हुए थे। उनके जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुई और दोबारा स्पष्टीकरण मांगा। सोमवार की सुनवाई में पुलिस को बताना होगा कि एफआईआर में शामिल भ्रष्टाचार की धाराएं चार्जशीट से क्यों हटाई गईं।
मामले में सब-इंस्पेक्टर जगमेहर, एएसआई सुरिंदर, विक्रम वधवा और उसके बेटों करण तथा कुणाल वधवा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने डीएसपी सोंधी की शिकायत पर केस दर्ज किया था। एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं।
वधवा करीब 661 करोड़ रुपए के कथित बैंक घोटाले में आरोपी है और घटना के समय बुडैल जेल में न्यायिक हिरासत में था। तबीयत खराब होने की शिकायत पर अदालत की अनुमति से उसे सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि चेकअप के बाद दोनों पुलिसकर्मी उसे जेल लौटाने के बजाय निजी वाहन से सेक्टर-17 के होटल सिटी हार्ट ले गए।
जांच के अनुसार, होटल में वधवा से उसके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों ने मुलाकात की। वहां उसकी संभावित फरारी की योजना पर चर्चा होने का आरोप भी सामने आया है। इन आरोपों और संबंधित साक्ष्यों का परीक्षण अदालत में होना है।
मूल बैंक घोटाला सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सरकारी विभागों के खातों से कथित फर्जी लेनदेन से जुड़ा है। जांच एजेंसियों ने वधवा पर निकाली गई रकम का लाभार्थी होने का आरोप लगाया है। होटल प्रकरण में अब भ्रष्टाचार की धाराएं हटाने के पुलिस के निर्णय पर अदालत ने स्पष्टीकरण मांगा है।
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