सोनीपत के कुशल दलाल ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड, बेटे की ट्रेनिंग के साथ पढ़कर मां बनीं अकाउंटेंट

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Kushal Dalal,

सोनीपत के गांव सिवानका निवासी 21 वर्षीय तीरंदाज कुशल दलाल ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स में कंपाउंड टीम इवेंट का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने साहिल जाधव और गणेश मणिरत्नम के साथ मिलकर भारत को यह सफलता दिलाई। जीत के बाद गांव में परिवार ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई।

कुशल की मां गीता दलाल के अनुसार, आठवीं कक्षा में बेटे का वजन बढ़ने पर परिवार ने उसे व्यायाम और दौड़ के लिए मैदान भेजना शुरू किया था। पिता संदीप दलाल को पहलवानी पसंद थी, इसलिए दिल्ली के अखाड़े में दाखिला कराया। हालांकि पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता में मां ने उसे वापस बुला लिया।

इसके बाद रोहतक में बॉक्सिंग सिखाने का विचार किया गया। अभ्यास करते बच्चों को देखकर कुशल ने मां से कहा कि वह किसी को पंच मारकर चोट नहीं पहुंचा सकता। परिवार ने बॉक्सिंग का विचार छोड़ दिया और एक परिचित की सलाह पर तीरंदाजी चुनी।

वर्ष 2017 में कुशल अपनी मां के साथ रोहतक के सेक्टर-1 में रहने लगे। राजीव गांधी स्टेडियम में तीरंदाजी के अभ्यास के बाद वह शारीरिक प्रशिक्षण करते थे। किसान पिता ने करीब 3.50 लाख रुपए के धनुष और तीर खरीदकर बेटे की तैयारी में सहयोग दिया।

गीता भी उस समय सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थीं। बेटे के अभ्यास के दौरान वह मैदान में बैठकर प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें पढ़ती थीं। लगातार तैयारी के बाद वह खरखौदा मार्केट कमेटी में अकाउंटेंट बनीं।

कुशल ने 2018 में विजयवाड़ा में अंडर-14 वर्ग का पहला गोल्ड जीता। वर्ष 2021 में पोलैंड की यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। वह विभिन्न आयु वर्गों में 15 से अधिक पदक जीत चुके हैं।

कुशल के मुताबिक, एशियन गेम्स के फाइनल में चीन ने शुरुआत में दो अंक की बढ़त बनाई थी। भारतीय टीम ने दबाव में वापसी करते हुए एक अंक की बढ़त हासिल की और गोल्ड जीता। अब उनका ध्यान राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, वर्ल्ड चैंपियनशिप और वर्ल्ड कप के ट्रायल पर है। पिता संदीप ने घर लौटने पर भव्य स्वागत करने की बात कही।

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