शहीद नहीं, दिवंगत फौजी के अंतिम संस्कार से पहले पत्नी को लेकर विवाद; परिवार ने बताया कुंवारा

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Naik Sher Singh

करनाल। हरियाणा के करनाल में सेना के नायक शेर सिंह की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार से पहले पारिवारिक विवाद खड़ा हो गया। 32 वर्षीय शेर सिंह ने 20 अक्टूबर को पंचकूला स्थित कमांडो अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। इससे पहले 12 अक्टूबर को भादसो रोड पर हुए सड़क हादसे में वह घायल हो गए थे। अंतिम संस्कार से पहले एक महिला ने खुद को फौजी की पत्नी बताते हुए पार्थिव शरीर पर अपना दावा पेश किया। वहीं, मौके पर पहुंचे परिजनों ने शेर सिंह को कुंवारा बताया। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के चलते मामला उलझ गया है।

अंतिम संस्कार से पहले महिला ने जताया पत्नी होने का दावा

जानकारी के अनुसार, शेर सिंह की मौत के बाद सेना की ओर से पार्थिव शरीर महिला को सौंप दिया गया था। महिला के दो बच्चे होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, जब फौजी के परिजन वहां पहुंचे तो उन्होंने महिला के दावे का विरोध किया। परिवार का कहना था कि शेर सिंह की शादी नहीं हुई थी और वह कुंवारा था।

परिजनों के विरोध के बाद महिला मौके से चली गई। इस घटनाक्रम ने अंतिम संस्कार से पहले ही विवाद की स्थिति पैदा कर दी। अब परिवार इस बात की जांच कराने की मांग कर रहा है कि महिला का शेर सिंह के साथ वास्तविक संबंध क्या था और उसने पत्नी होने का दावा किन आधारों पर किया।

बुढ़नपुर बांगर गांव में किया गया अंतिम संस्कार

विवाद के बीच बुधवार रात को शेर सिंह का अंतिम संस्कार उनके गांव बुढ़नपुर बांगर में किया गया। इस घटनाक्रम के बाद परिवार और पंचायत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। परिजनों का कहना है कि पूरे मामले के तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह का संदेह बाकी न रहे।

आर्मी फंड और सैलरी पर भी उठाए सवाल

परिवार और पंचायत ने मांग की है कि जब तक महिला के दावे और फौजी के वैवाहिक संबंधों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक शेर सिंह के आर्मी फंड या वेतन की राशि किसी भी खाते में जमा नहीं की जाए। उनका कहना है कि पहले सभी दस्तावेजों और दावों की जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही संबंधित वित्तीय मामलों में निर्णय लिया जाए।

फिलहाल इस मामले में सेना की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। महिला के दावे और परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तविक स्थिति क्या है और संबंधित लाभों पर किसका वैध अधिकार बनता है।

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