नारनौल में आपसी विवाद के दौरान एक व्यक्ति को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल करने का मामला सामने आया है। आरोप एक हिस्ट्रीशीटर पर लगा है। बताया जा रहा है कि विवाद पीड़ित के भतीजे की कार के शीशे तोड़ने की घटना से जुड़ा था। हमले में व्यक्ति को चार गोलियां लगीं। उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने मामले की जांच और आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। पीड़ित के भतीजे की कार के शीशे तोड़े जाने के बाद तनाव और बढ़ गया था।
इसी मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी होने की बात सामने आई है। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद हिस्ट्रीशीटर ने व्यक्ति पर फायरिंग कर दी।
हमले में पीड़ित को चार गोलियां लगने की जानकारी है। गोलियां लगते ही वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा।
फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना पुलिस और घायल के परिजनों को दी गई।
घायल को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर चोटों को देखते हुए डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहां से फायरिंग से जुड़े संभावित साक्ष्य जुटाए गए।
पुलिस के अनुसार मामले में जिस व्यक्ति पर गोली चलाने का आरोप है, उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
हिस्ट्रीशीटर बताए जा रहे आरोपी के खिलाफ पहले दर्ज मामलों और उसकी वर्तमान गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटाई जा सकती है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पीड़ित के भतीजे की कार के शीशे कब और किन परिस्थितियों में तोड़े गए थे।
कार में तोड़फोड़ की घटना को लेकर पहले कोई शिकायत दी गई थी या दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास हुआ था, इसकी भी जांच की जा सकती है।
घायल व्यक्ति के बयान को मामले में महत्वपूर्ण माना जाएगा। स्वास्थ्य में सुधार होने पर पुलिस उससे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ले सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इससे फायरिंग के समय मौके पर मौजूद लोगों और हमलावर की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलेगी।
घटनास्थल तथा आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी पुलिस खंगाल सकती है। फुटेज में आरोपी की आवाजाही या घटना से संबंधित वाहन दिखाई देने पर जांच को दिशा मिल सकती है।
फायरिंग में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी भी पुलिस के लिए अहम होगी। हथियार मिलने पर उसकी फोरेंसिक और बैलिस्टिक जांच कराई जा सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाएगी कि आरोपी अकेला था या घटना के समय उसके साथ अन्य लोग भी मौजूद थे।
यदि किसी अन्य व्यक्ति ने हमले की योजना बनाने, हथियार उपलब्ध कराने या आरोपी को भागने में मदद की है तो उसकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे सकती है। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद भी ली जा सकती है।
घायल की मेडिकल रिपोर्ट से शरीर पर लगी गोलियों और चोटों की गंभीरता स्पष्ट होगी। यह रिपोर्ट आगे की कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनेगी।
फिलहाल नारनौल पुलिस मामले की जांच कर रही है। भतीजे की कार के शीशे तोड़ने से शुरू हुए कथित विवाद और फायरिंग के बीच क्या संबंध है, इसकी पूरी तस्वीर आरोपी की गिरफ्तारी और अन्य साक्ष्यों के सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।
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