सोनीपत की सरकारी यूनिवर्सिटी में छात्राओं का विरोध, असिस्टेंट प्रोफेसर पर अनुचित व्यवहार के आरोप

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Sonipat News

सोनीपत की एक सरकारी यूनिवर्सिटी में छात्राओं के विरोध प्रदर्शन का मामला सामने आया है। छात्राओं ने एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर अनुचित व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रोफेसर ने कथित तौर पर गलत तरीके से छुआ, कपड़ों को लेकर टिप्पणियां कीं और रात के समय मैसेज भी भेजे। मामले के सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में विरोध और चर्चा का माहौल है।

छात्राओं के अनुसार, प्रोफेसर के व्यवहार को लेकर उन्होंने पहले भी अपनी आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल होना चाहिए।

छात्राओं ने आरोप लगाया कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने बातचीत के दौरान उनकी व्यक्तिगत सीमाओं का उल्लंघन किया। कुछ छात्राओं ने गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया, जबकि कुछ ने ड्रेस को लेकर की गई कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।

इसके अलावा छात्राओं ने रात के समय मोबाइल पर संदेश भेजे जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस तरह के संदेशों से उन्हें असहज महसूस हुआ और उन्होंने इसे लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

मामले के सामने आने के बाद छात्राओं ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने जांच कमेटी गठित करने, शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की।

यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए अब मामले की गंभीरता से जांच करना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में छात्राओं की शिकायतों को दर्ज कर संबंधित पक्षों के बयान लिए जा सकते हैं। इसके अलावा उपलब्ध संदेश, रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।

छात्राओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना जांच के दोषी ठहराना नहीं, बल्कि अपनी शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित कराना है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो और शिकायतकर्ताओं को किसी तरह का दबाव महसूस न हो।

वहीं, आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यूनिवर्सिटी परिसर में इस घटना को लेकर छात्रों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कई विद्यार्थियों ने शिकायतों की निष्पक्ष जांच और कैंपस में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की मांग की है।

ऐसे मामलों में विश्वविद्यालयों में आंतरिक शिकायत समिति या संबंधित संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से शिकायतों की जांच की जा सकती है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना जरूरी होता है।

छात्राओं ने कहा कि यदि उनकी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती तो उन्हें सार्वजनिक रूप से विरोध करने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।

मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संस्थागत नियमों के तहत संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है।

छात्राओं के विरोध के बीच यूनिवर्सिटी में सुरक्षा, शिकायत निवारण और विद्यार्थियों की समस्याओं पर प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल सोनीपत की सरकारी यूनिवर्सिटी में छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की चर्चा है। छात्राएं निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग पर कायम हैं, जबकि मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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