सिरसा : ऐलनाबाद क्षेत्र के गांव कुत्ताबढ़ निवासी सेना के जवान सुखचैन सिंह (30) का जम्मू-कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। गांव के सरपंच बेअंत सिंह के अनुसार सुखचैन सिंह की तैनाती बॉर्डर के पास थी और गुरुवार को ड्यूटी के दौरान करंट लगने से उनकी जान चली गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
सुखचैन सिंह भारतीय सेना की 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट में तैनात थे। वह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे और करीब 11 वर्षों से देश की सेवा कर रहे थे।
छोटे भाई सरबजीत सिंह ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब 8 बजे परिवार की सुखचैन से फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने वहां सब कुछ ठीक होने की बात कही थी। इसके कुछ घंटे बाद दोपहर करीब एक बजे सेना के अधिकारियों का फोन आया और परिवार को सुखचैन सिंह के निधन की सूचना दी गई।
परिवार के अनुसार सुखचैन करीब दो महीने पहले छुट्टी पर घर आए थे। उनकी अगली छुट्टी को लेकर भी परिवार में बातचीत चल रही थी। छोटे भाई सरबजीत के मुताबिक सुखचैन 1 अक्टूबर को अपने भतीजे आकाशदीप के जन्मदिन पर घर आने वाले थे और घटना से एक दिन पहले ही इस संबंध में उनसे बातचीत हुई थी।
सुखचैन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और करीब पांच साल का बेटा है। उनकी शादी वर्ष 2020 में हुई थी। सुखचैन के पिता बलविंद्र सिंह का निधन उस समय हो गया था, जब वह करीब सात वर्ष के थे। इसके बाद उनकी मां अमर कौर और परिवार ने उनका पालन-पोषण किया।
परिवार में सुखचैन के दो भाई और एक बहन हैं। सभी भाई-बहन शादीशुदा हैं। उनके बड़े भाई गांव में शटरिंग का काम करते हैं। परिवार लंबे समय से गांव कुत्ताबढ़ में रह रहा है।
जवान के निधन की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंचे। गांव में मातम का माहौल है और परिवार को सुखचैन के पार्थिव शरीर के पहुंचने का इंतजार है।
सैनिक बोर्ड से जुड़े अधिकारियों के अनुसार राजौरी क्षेत्र में खराब मौसम के कारण पार्थिव शरीर को पैतृक गांव तक पहुंचाने में परेशानी आई। बारिश और मौसम की परिस्थितियों के चलते हवाई मार्ग के बजाय सड़क मार्ग से पार्थिव शरीर लाने की व्यवस्था की गई।
परिवार और ग्रामीणों के अनुसार सुखचैन सिंह का सेना से विशेष लगाव था। करीब एक दशक पहले सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने लगातार अपनी सेवाएं दीं। अब अचानक उनके निधन की खबर ने परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है।
पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्रामीण भी अपने जवान को अंतिम विदाई देने की तैयारियों में जुटे हैं।
![]()











