गुरुग्राम : मानसून के दौरान गुरुग्राम में बार-बार होने वाले जलभराव को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री एवं गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर विजिलेंस जांच की मांग की है। पत्र में उन्होंने सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी शिव सिंह रावत के कार्यकाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि रावत ने इन आरोपों से जुड़े जिम्मेदारी के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि शहर के प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम का रखरखाव उनके कार्यक्षेत्र में नहीं था।
राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार गुरुग्राम में मानसून के दौरान हुए भारी जलभराव के बाद 2 सितंबर को उन्होंने जीएमडीए, नगर निगम गुरुग्राम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए काम कर रही एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि बैठक में शहरी विकास सलाहकार एवं पूर्व मुख्य सचिव डीएस ढेसी सहित अधिकारियों से हुई चर्चा के दौरान उन्हें बताया गया कि प्राकृतिक बरसाती नालों और जल निकासी के रास्तों को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है।
राव इंद्रजीत ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें अधिकारियों से जानकारी मिली कि शिव सिंह रावत करीब सात वर्षों तक गुरुग्राम जिले में सिंचाई विभाग में अलग-अलग पदों पर तैनात रहे और हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों के दौरान प्राकृतिक नालों और ड्रेनों पर कथित अतिक्रमण को लेकर विभिन्न बिल्डरों को कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट के तहत सैकड़ों नोटिस जारी किए गए, लेकिन अतिक्रमण हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस जारी करने के बावजूद मामलों को आगे नहीं बढ़ाया गया और इसमें भ्रष्टाचार की आशंका है। राव इंद्रजीत ने यह सवाल भी उठाया कि संबंधित अवधि में नालों की सफाई और रखरखाव को लेकर क्या कार्रवाई की गई और इस पर कितना बजट खर्च हुआ।
केंद्रीय मंत्री ने गुरुग्राम में हुए जलभराव को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि इससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। भारी बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ और जलभराव में वाहनों तथा स्कूल बसों के फंसने की घटनाएं भी सामने आई थीं।
राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पूरे मामले की विजिलेंस जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि प्राकृतिक नालों पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए जारी नोटिसों पर आगे कार्रवाई क्यों नहीं हुई और संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
इस मामले में सेवानिवृत्त अधिकारी शिव सिंह रावत का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी उनके पास होने के दावे को गलत बताया है। रावत के मुताबिक वह गुरुग्राम कंस्ट्रक्शन सर्किल के अधीक्षण अभियंता थे और उनका प्रमुख कार्य एनसीआर वाटर सप्लाई कैनाल के माध्यम से पेयजल आपूर्ति से संबंधित था।
रावत का कहना है कि शहर के प्रमुख शहरी ड्रेनेज सिस्टम और नालों का रखरखाव अलग-अलग समय में एचएसवीपी, नगर निगम और जीएमडीए जैसी एजेंसियों के अधीन रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के जलभराव की जिम्मेदारी उनके कार्यक्षेत्र पर डालना सही नहीं है।
ऐसे में गुरुग्राम के जलभराव को लेकर अब जिम्मेदारी और विभागीय अधिकार क्षेत्र का सवाल भी सामने आ गया है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री ने विजिलेंस जांच की मांग करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं संबंधित सेवानिवृत्त अधिकारी ने उन आरोपों के आधार और जिम्मेदारी के दावे को चुनौती दी है।
फिलहाल लगाए गए आरोप जांच में साबित नहीं हुए हैं। विजिलेंस जांच की मांग पर राज्य सरकार की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इसके बाद ही मामले में प्रशासनिक जवाबदेही और आरोपों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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