टीकाकरण अभियान से पहले बड़ी लापरवाही, वैक्सीन पहुंची लेकिन जरूरी संसाधनों का इंतजार

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Animal Husbandry Department,

पशुपालन विभाग एक बार फिर अपनी तैयारियों को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। पशुओं में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन अभियान की तैयारी के बीच विभागीय स्तर पर आवश्यक संसाधनों की कमी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, वैक्सीन की खेप तो संबंधित केंद्रों तक पहुंचा दी गई है, लेकिन टीकाकरण के लिए जरूरी नीडल और सीरिंज उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में गलघोंटू और मुंह-खुर जैसी बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण अभियान चलाया गया था। अब पशुओं को लम्पी जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन की योजना बनाई गई है। हालांकि आवश्यक उपकरणों की अनुपलब्धता ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि केवल वैक्सीन पहुंचा देने से अभियान सफल नहीं हो सकता। टीकाकरण के लिए नीडल, सीरिंज और अन्य आवश्यक सामग्री का समय पर उपलब्ध होना भी उतना ही जरूरी है। संसाधनों की कमी के चलते कई क्षेत्रों में अभियान प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बजट संबंधी कारणों के चलते आवश्यक सामग्री की खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, नीडल और सीरिंज की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी जाएगी। वहीं पशुपालकों का मानना है कि यदि समय पर टीकाकरण नहीं हुआ तो पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लम्पी, मुंह-खुर और गलघोंटू जैसी बीमारियां पशुधन के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में टीकाकरण अभियान का समय पर और प्रभावी तरीके से संचालन बेहद आवश्यक है। किसी भी प्रकार की देरी से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

फिलहाल विभाग का कहना है कि आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के प्रयास जारी हैं और जल्द ही टीकाकरण अभियान को सुचारु रूप से शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। पशुपालक अब विभागीय तैयारियों और आगामी निर्णयों पर नजर बनाए हुए हैं।

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