पानीपत में ब्रांडेड कपड़ों और लग्जरी लाइफस्टाइल के शौक को पूरा करने के लिए गैंग बनाने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में आरोपियों के बीच जेल में मुलाकात के बाद आपराधिक गतिविधियों की योजना तैयार होने की बात सामने आई है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि हथियार रखने के मामले में सख्त कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने सुआ जैसे धारदार औजार का इस्तेमाल किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों का मकसद वारदातों से पैसा जुटाकर महंगे कपड़े, जूते और अन्य लग्जरी सामान खरीदना था। इसी उद्देश्य से उन्होंने आपस में संपर्क बढ़ाया और बाद में गैंग के रूप में काम करना शुरू किया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़ी अन्य वारदातों और लोगों की जानकारी जुटा रही है।
जांच में सामने आया कि गैंग के कुछ सदस्यों की मुलाकात पानीपत जेल में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी संपर्क बनाए रखा। इसके बाद वारदातों के जरिए कमाई करने की योजना पर काम किया गया।
पुलिस को जांच के दौरान हथियार के इस्तेमाल से जुड़ी एक अलग रणनीति की भी जानकारी मिली। आरोप है कि आर्म्स एक्ट की कार्रवाई से बचने की सोच के तहत आरोपियों ने सुआ जैसे धारदार औजार को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। पुलिस अब बरामद सामान और आरोपियों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
जांच में एक सुनार की भूमिका भी सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि वह चोरी या लूट के सामान को उसकी वास्तविक कीमत से काफी कम, करीब 30 प्रतिशत मूल्य पर खरीदता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ऐसे सामान की कितनी बार खरीद-फरोख्त हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे।
पुलिस के लिए अब गैंग के पूरे नेटवर्क का पता लगाना महत्वपूर्ण है। वारदातों से हासिल सामान को कहां बेचा जाता था, उससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था और आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
ब्रांडेड कपड़ों और महंगे सामान के शौक के लिए अपराध की राह चुनने का यह मामला युवाओं में बढ़ते दिखावे और आसान पैसे की चाह पर भी सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि अपराध से हासिल पैसा लंबे समय तक किसी के लिए लाभ का माध्यम नहीं बन सकता और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाती है।
सुनार द्वारा कथित तौर पर कम कीमत पर सामान खरीदने की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह सत्यापित करने का प्रयास कर रही है कि बरामद या बेचा गया सामान किन वारदातों से जुड़ा था और उसकी वास्तविक कीमत कितनी थी।
फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और गैंग से जुड़े अन्य लोगों तथा संभावित वारदातों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ गैंग के काम करने के तरीके और उससे जुड़े अन्य नाम सामने आने की संभावना है।
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